रेलवे को निजी हाथों में बेचने का विरोध

Published at :04 May 2015 9:04 PM (IST)
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रेलवे को निजी हाथों में बेचने का विरोध

प्रतिनिधि, मिहिजामकेंद्र सरकार द्वारा रेल मंे निजीकरण को बढ़ावा देने के विरोध मंे एनएफआइआर द्वारा सोमवार को चिरेका कार्यालय के समीप गेट में बैठक का आयोजन किया गया. मौके पर वक्ताओं ने केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की तथा कहा कि एक साजिश के तहत रेलवे में निजीकरण को प्रश्रय दिया जा रहा है. 28 […]

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प्रतिनिधि, मिहिजामकेंद्र सरकार द्वारा रेल मंे निजीकरण को बढ़ावा देने के विरोध मंे एनएफआइआर द्वारा सोमवार को चिरेका कार्यालय के समीप गेट में बैठक का आयोजन किया गया. मौके पर वक्ताओं ने केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की तथा कहा कि एक साजिश के तहत रेलवे में निजीकरण को प्रश्रय दिया जा रहा है. 28 अप्रैल को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित धरना कार्यक्रम मंे नेशनल ज्वांइट एक्शन कमेटी ने रेलवे में देवराय कमेटी के रिपोर्ट की आलोचना कर इसकी अनुसंशा को लागू किये जाने का विरोध किया है. देवराय कमेटी ने रेल उत्पादन इकाइयों ने डीजल लोकोमोटिव कारखाना बनारस, चितरंजन रेल इंजन कारखाना, कोच फैक्ट्री कपूरथला, श्री पैरम्बदुर कोच फैक्ट्री, एक्सल फैक्ट्री बैंगलोर के अलावा रेलवे सुरक्षा बल, रेलवे के विद्यालयों एवं चिकित्सालयों को निजी हाथों मंे सौंपने की सिफारिश की है. वक्ताओं ने एफडीआइ का पुरजोर विरोध कर कहा कि यदि केंद्र सरकार रेल मंे आउट र्सोसिंग आफलोडिंग एवं निजीकरण पर रोक नहीं लगाती है तो आगामी 23 नवंबर से एनएफआइआर देश भर मंे अनिश्चितकालीन हड़ताल करने करने पर विचार कर रही है. मौके पर सातवां पे कमीशन वर्ष 2004 से लागू करने की मांग वक्ताओं ने किया. कार्यक्रम मंे महासचिव एसके लाहा, बीएन सोनार, पी श्रीवास्तव, शंकर राय सहित कई सदस्यों ने अपने विचारों को रखा.

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