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इंकैब : एनसीएलएटी में कर्मचारियों ने अपील दायर की, 16 को सुनवाई की संभावना

केबुल कंपनी के अधिग्रहण मामले में कंपनी के कर्मियों ने एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ एनसीएलएटी में अपील दायर की है.

– एनसीएलटी कोलकाता ने 3 दिसंबर 2025 को वेदांता की 545 करोड़ की समाधान योजना को मंजूरी दी थी

– कर्मचारियों का दावा कि 21.63 करोड़ की देनदारी को साजिश के तहत 4000 करोड़ दिखाया गया

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अपील के मुख्य बिंदु

– एनसीएलएटी के 4 जून 2021 के आदेश का उल्लंघन, जिसमें सीओसी को अवैध घोषित किया गया था

– एसबीआइ द्वारा 2014 में बाइफर को लिखे पत्र को छुपाना, जिसमें 1998 के किसी ऋण का जिक्र नहीं था

– ट्रॉपिकल वेंचर्स कंपनी की ओर से 1990 करोड़ रुपये का अविश्वसनीय दावा पेश किया गया

– आइसीआइसीआइ बैंक : पूर्व में कोई दावा न होने के बावजूद 500 करोड़ रुपये का दावा पेश किया

वरीय संवाददाता, जमशेदपुर

इंकैब इंडस्ट्रीज (केबुल कंपनी) के अधिग्रहण के एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ कर्मचारियों ने एनसीएलएटी में अपील दायर की है. 16 जनवरी को मामले में सुनवाई होने की संभावना है. कर्मचारियों के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में 3 जनवरी को आवेदन दिया गया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है. मालूम हो कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) कोलकाता ने 3 दिसंबर 2025 को वेदांता लिमिटेड की 545 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दी थी, जिसके तहत इंकैब का अधिग्रहण किया जाना है. अब इंकैब के हजारों कर्मचारियों की निगाहें एनसीएलएटी के फैसले पर टिकी हैं.

दस्तावेज और अदालती आदेशों की अनदेखी का आरोप

अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि कर्मचारियों की ओर से दायर अपील में वर्तमान और पूर्व रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी ) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये गये हैं. दिल्ली हाइकोर्ट ने 6 जनवरी 2016 को इंकैब की कुल बैंक देनदारी महज 21.63 करोड़ रुपये तय की थी. पूर्व आरपी शशि अग्रवाल और वर्तमान आरपी पंकज टिबरेवाल ने इस आदेश को दरकिनार कर कमला मिल्स, पेगासस और अन्य कंपनियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया. अपील में कहा गया है कि पूर्व आरपी शशि अग्रवाल को पहले ही कदाचार के कारण हटाया जा चुका है. आइबीबीआइ ने शशि अग्रवाल की अर्हता स्थायी रूप से समाप्त कर दी है. इसके बावजूद नये आरपी पंकज टिबरेवाल ने न केवल पुराने फर्जी दावों को स्वीकार किया, बल्कि आइसीआइसीआइ बैंक और ट्रॉपिकल वेंचर्स जैसे नये दावेदार भी खड़े कर दिये.

अदालत की पिछली टिप्पणियों का हवाला

कर्मचारियों ने अपील में उल्लेख किया है कि एनसीएलटी की विदिशा बनर्जी और अरविंद देवनाथन की बेंच ने पहले ही इन ऋणों की जांच के आदेश दिये थे और एचएसबीसी के ऋण को फर्जी पाया था. आरोप है कि पंकज टिबरेवाल ने भ्रष्टाचार के चलते ऋणों की सही जांच (सैंक्शन लेटर, चार्ज डॉक्यूमेंट्स आदि के आधार पर) नहीं की और केवल कागजी हेरफेर के जरिये लेनदारों की कमेटी (सीओसी ) को अवैध रूप से बहाल रखा.

वसूली हो, तो इन्वेस्टर की जरूरत नहीं

कर्मचारियों का कहना है कि यदि कमला मिल्स के रमेश घमंडीराम गोवानी द्वारा हड़पे गये लगभग 600 करोड़ रुपये और पूर्व व वर्तमान आरपी द्वारा कथित रूप से लिये गये 20 करोड़ रुपये की वसूली कर ली जाये, तो इंकैब के पुनरुद्धार के लिए किसी बाहरी निवेशक या वेदांता जैसी योजना की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी.

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