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48 किलो गांजा के साथ धराये दो युवक साक्ष्य अभाव में बरी

Updated at : 27 Aug 2024 9:37 PM (IST)
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48 किलो गांजा के साथ धराये दो युवक साक्ष्य अभाव में बरी

एक ओर जहां पुलिस नशा के कारोबार को खत्म करने की मुहिम चला रही है तो दूसरी ओर पुलिस की लापरवाही की वजह से नशा के सामान के साथ पकड़े गये आरोपी साक्ष्य के अभाव में कोर्ट से बरी हो जा रहे हैं.

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पुलिस ने एफएसएल जांच के लिए निकाला 250-250 ग्राम गांजा, भेजा सिर्फ 8 व 9 ग्राम

पुलिस मजबूती से नहीं रख पायी अपना पक्ष

16 जनवरी 2019 को सुंदरनगर पुलिस ने एक्सयूवी कार से बरामद किया था 48 किलो गांजा

पांच वर्ष बाद भी ओडिसा के गांजा सप्लायर मिथुन को गिरफ्तार नहीं कर सकी पुलिस

एफएसएल जांच के लिए निकाला 250-250 ग्राम गांजा, भेजा सिर्फ 8 व 9 ग्राम

जमशेदपुर :

एक ओर जहां पुलिस नशा के कारोबार को खत्म करने की मुहिम चला रही है तो दूसरी ओर पुलिस की लापरवाही की वजह से नशा के सामान के साथ पकड़े गये आरोपी साक्ष्य के अभाव में कोर्ट से बरी हो जा रहे हैं. मंगलवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ. सुंदरनगर थाना की पुलिस की लापरवाही के कारण 48 किलो गांजा के साथ पकड़ाये मानगो रोड नंबर-17 ग्रीन वैली निवासी मो. परवेज और मो. नवाब को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया. मामले की सुनवाई प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश की अदालत में हुआ. बचाव पक्ष से अधिवक्ता सह पूर्व लोकअभियोजक सुशील जायसवाल ने कोर्ट में पैरवी की. मामला 16 जनवरी 2019 का है.

सुंदरनगर थाना की पुलिस ने सुंदरनगर चौक के पास से एक्सयूवी कार से तीन पैकेट में 48 किलो गांजा बरामद किया था. छापामारी के दौरान पुलिस ने मानगो रोड नंबर-17 ग्रीन वैली निवासी मो. परवेज और मो. नवाब को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने कार भी जब्त किया था. उक्त मामले में सुंदरनगर थाना में पदस्थापित एएसआई सूर्यदेव दास के बयान पर सुंदरनगर थाना में मानगो रोड नंबर-17 ग्रीन वैली मो. परवेज, मो,नवाब. कार मालिक मो. राजा और ओडिसा के सेगहा निवासी व गांजा सप्लायर मिथुन व अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया था. छापामारी में तत्काल डीएसपी (हेड क्वार्टर वन) पवन कुमार और सुंदरनगर थाना प्रभारी उपेंद्र नारायण सिंह भी शामिल थे. छापामारी के बाद पुलिस ने जब्त गांजा के तीन बंडल में से 250-250 ग्राम गांजा एफएसएल जांच के लिए निकाला था. लेकिन एफएसएल को सिर्फ 8 व 9 ग्राम ही गांजा भेजा गया. साथ ही जब्त गांजा को बरामदगी के एक सप्ताह के अंदर एफएसएल जांच के लिए भेजा जाना होता है, मगर पुलिस ने तीन महीने बाद 10 अप्रैल को जांच के लिए भेजा. इसके अलावा बरामद गांजा को मजिस्ट्रेट के समक्ष जब्ती की जाती है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. वहीं इस मामले में पुलिस ने कार मालिक मो. राजा को बाद में केस से हटा दिया. वहीं, पांच वर्ष बाद भी पुलिस गांजा सप्लायर मिथुन को गिरफ्तार नहीं कर सकी है. पुलिस कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख सकी. केस का अनुसंधान सुंदरनगर थाना प्रभारी उपेंद्र नारायण सिंह खुद कर रहे थे. इस केस में 12 लोगों की गवाही हुई थी. बावजूद दोनों आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी हो गये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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