हादसे के एक घंटे के अंदर पीड़ित को अस्पताल पहुंचायें और पायें पांच हजार तक की राशि
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 08 Jan 2025 7:37 PM
वर्ष 2024 में मात्र सात लोगों को मिला गुड सेमेरिटन का पुरस्कार
Jamshedpur news.
अगर पर सड़क पर जा रहे हैं और सड़क दुर्घटना में कोई जख्मी की परवाह कर उसे अस्पताल पहुंचाते हैं, तो आप दुआ के साथ साथ जिला प्रशासन की ओर से ‘गुड सेमेरिटन’ (नेक आदमी) की उपाधि और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है. पूर्वी सिंहभूम जिले में नेक लोगों की कमी तो नहीं है, लेकिन गुड सेमेरिटन योजना के बारे में जानकारी के अभाव में लोग इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं. अगर हम वर्ष 2023 की बात करें, तो जिले में 350 से ज्यादा सड़क दुर्घटना हुई है. इसमें 220 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, लेकिन गुड सेमेरिटन योजना की लाभ पूरे साल भर में सिर्फ सात लोगों ने ली है. जिले के सात लोगों को ही गुड सेमेरिटन की उपाधि दी गयी है. वहीं 2025 की बात करें, तो अब तक एक भी व्यक्ति को इसका लाभ नहीं मिला है. जिला प्रशासन की ओर से सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को ‘गुड सेमेरिटन’ काे पुरस्कृत करने के लिए दिये गये हैं 25-25 हजार दिये गये हैं. जिन केंद्रों को राशि दी गयी है, उसमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका, घाटशिला, डुमरिया, चाकुलिया, जुगसलाई. पटमदा, धालभूमगढ़, बहरागोड़ा व मुसाबनी शामिल है. ’नेक सेमेरिटन योजना’ के तहत व्यक्ति पांच हजार रुपये तक का पुरस्कार प्राप्त कर सकते हैं. अगर सड़क दुर्घटना में घायल को ‘गोल्डन आवर’ (एक घंटे) के भीतर कोई एक व्यक्ति अस्पताल पहुंचाता है, तो उसे दो हजार रुपये दिया जाता है. अगर घायल को अस्पताल पहुंचाने में दो लोग शामिल हैं, तो दोनों मददगार को दो- दो हजार रुपये दी जाती है. वहीं घायल को अस्पताल पहुंचाने में दो से ज्यादा लोग हैं तो पांच हजार रुपये की राशि सभी मददगार के बीच बराबर – बराबर में बांटी जायेगी.
इसलिए बनाया गया नियम
सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को पुलिस परेशान न करे, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने गुड सेमेरिटन नियम बनाया. निर्देश दिया कि घायल की मदद करने वाले और अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति से पुलिस उसका नाम या पता नहीं पूछेगी. यह पुरस्कार पाने के लिए घायलों को ‘गोल्डन आवर’ (एक घंटा) के अंदर अस्पताल पहुंचाना होगा. अस्पताल प्रबंधन भी ऐसे व्यक्ति को परेशान नहीं करेगा. घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के बाद केवल पुलिस को सूचना देनी होगी. इस योजना के लिए बनी समिति में पुलिस अधीक्षक, सीएमओ और डीटीओ शामिल होते हैं. समिति चयनित व्यक्तियों के नाम परिवहन आयुक्त को भेजती है. उसके बाद पुरस्कार राशि संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते में भेज दी जाती है.
अधिकतर हैं अनजान
गुड सेमेरिटन योजना के बारे में अब भी अधिकांश लोगों अनजान है. इस कारण से लोग इसका फायदा नहीं ले पाते हैं. लोगों को यह भी लगता है कि सड़क हादसों में घायलों को अस्पताल पहुंचाने पर पुलिस का चक्कर में पड़ना पड़ सकता है. इस कारण से कई लोग घायलों को अनदेखा भी करते हैं. यह भी सच्चाई है कि अधिकतर पुलिसकर्मियों को भी इस कानून के बारे में नहीं पता है. इस कानून के अनुसार घायलों की मदद करने वाले व्यक्ति को थाने में नहीं रोका जा सकता, उसे तत्काल घर भेजना होगा.
गुड सेमेरिटन की खासियत
घायल को ‘गोल्डन आवर’ (एक घंटा) के भीतर अस्पताल पहुंचायें.अस्पताल में उन्हें कोई रोकेगा नहींमददगार को पुलिस नहीं करेगी परेशान
मददगार को नहीं करना होगा बिल का भुगतानडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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