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सरहुल नाइट में कलाकारों ने बांधा समां

Updated at : 08 Apr 2024 11:02 PM (IST)
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सरहुल नाइट में कलाकारों ने बांधा समां

सीतारामडेरा में आदिवासी उरांव समाज की ओर से सोमवार को सांस्कृतिक संध्या सरहुल नाइट में कलाकारों ने खूब समां बांधा.

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ओ रे सुंदर झारखंड रे, ओ रे छोटानागपुर रे… गीत पर झूमे लोग

सीतारामडेरा स्थित आदिवासी उरांव समाज भवन में किया गया आयोजन

जमशेदपुर. सीतारामडेरा स्थित आदिवासी उरांव समाज भवन में सोमवार को एक अद्वितीय सांस्कृतिक संध्या “सरहुल नाइट ” का आयोजन किया गया. इसमें दर्शकों ने नृत्य और संगीत का खूब आनंद लिया. रांची रीझवार ग्रुप के इग्नेश कुमार, कुमार प्रीतम व सुमन गुप्ता समेत अन्य सिंगरों ने एक से बढ़कर एक नागपुरी सरहुल गीत व मॉडर्न गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को झुमाया. ओ रे सुंदर झारखंड रे, ओ रे छोटानागपुर रे…, ए कैमरा मैन, ए कैमरा मैन मैडम सुनो ना, एगो फोटो खिचायेंगे, नया लुक वाला एगो फोटो खिचायेंगे…, सरीखे गानों को दर्शकों ने खूब पसंद किया. रांची के रीझवार ग्रुप के कलाकारों के मनोरंजन से भरपूर गानों ने दर्शकों को आकर्षित किया, जिससे वे कार्यक्रम के अंत तक बंधे रहे.

संस्कृति व कला के महत्व को दर्शाया

यह आयोजन न केवल स्थानीय समुदाय की सांस्कृतिक धरोहर को प्रस्तुत करने का माध्यम था, बल्कि एक साथ सभी उम्र के लोगों को मनोरंजन का भी अवसर प्रदान किया. इस तरह “सरहुल नाइट ” ने संस्कृति एवं कला के महत्व को दर्शाया गया. यह आयोजन सामाजिक एकता और समृद्धि को बढ़ावा देने का भी एक माध्यम बना. कला संस्कृति के माध्यम से समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और समरसता को बढ़ावा मिला. दर्शकों ने कलाकारों की प्रतिभा और प्रयास की खूब सराहना की.

सरहुल पर्व आत्म-सम्मान और एकता का प्रतीक

“सरहुल नाइट ” में सांस्कृतिक संध्या का विधिवत शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाज से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. मौके पर समाज के बुद्धिजीवी सोमा काेया ने सरहुल पर्व की महत्ता के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि यह पर्व आदिवासी समुदायों के लिए आत्म-सम्मान और एकता का प्रतीक है. सरहुल पर्व में लोग अपने परंपरागत नृत्य व गीत के माध्यम से अपनी संस्कृति को उजागर करते हैं. इसके अलावा, यह पर्व समाज में सामाजिक समरसता और गरिमा का भाव फैलाता है. इसे न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण माना जाता है, बल्कि इसका सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व भी है. सरहुल पर्व के माध्यम से समाज की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जाता है और लोगों को एक-दूसरे के साथ जुड़ा रहने की प्रेरणा मिलती है. कार्यक्रम को सफल आयोजन में किशोर लकड़ा, राजन कुजूर, बबलू खालको, गंगाराम तिर्की, जीतु खालको, अमरदीप तिर्की, बादल मिंज, विजेंद्र मिंज, रामू तिर्की, लखींद्र मिंज, महेश कुजूर समेत अन्य ने योगदान दिया. कार्यक्रम का संचालन राकेश उरांव ने किया.

हो व उरांव समाज के कलाकारों ने दिखायी प्रतिभा

स्थानीय हो व उरांव समाज के नृत्य दलों ने भी सरहुल नाइट कार्यक्रम में मंच को साझा किया. कलाकारों ने अपनी दमदार प्रस्तुति से लोगों का खूब मनोरंजन किया. उनके मनमोहक नृत्य ने दर्शकों को चरम संतुष्टि और आनंद की अनुभूति करायी. उनकी गतिविधियों में रस भरा था, जिससे समाज के लोगों को भावनात्मक अनुभव मिला.

सरई फूल व पारंपरिक वस्त्र देकर समाज के अगुवा को किया सम्मानित

सांस्कृतिक कार्यक्रम सरहुल नाइट में समाज के अगुआ, प्रबुद्ध बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, विभिन्न सामाजिक संगठन के प्रमुखों व अतिथियों को सरई अर्थात सखुआ का फूल व पारंपरिक वस्त्र देकर सम्मानित किया गया. इस दौरान उरांव समाज समेत अन्य जनजातीय समुदाय के लोगों ने आपसी एकता व भाईचारा को बनाये रखने का संकल्प लिया.

युवा जमकर थिरके, खूब मस्ती की

सरहुल नाइट में युवा उत्साहित थे और उन्होंने लोक नृत्यों के राग में जमकर नृत्य करते हुए आनंद में डूबे रहे. लोग एक-दूसरे के साथ प्रेम और एकता का भाव अनुभव कर रहे थे. उन्होंने अपने साथीजनों के साथ सरहुल गीत-संगीत के ताल पर एक-दूसरे का हाथ थामे नृत्य कर आयोजन का लुत्फ उठाया.

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