ओडिशा में हाइवा दुर्घटना में टूटी युवक की पेल्विक हड्डी, डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन कर दी नयी जिंदगी

Author Chandra Shekhar|Edited by Sweta Vaidya
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एमजीएम अस्पताल में डॉक्टरों ने प्यूबिक सिम्फिसिस (कमर के नीचे दोनों पैरों को जोड़ने वाली हड्डी) टूटने का किया सफल ऑपरेशन  | Prabhat Khabar Network

एमजीएम अस्पताल में डॉक्टरों ने प्यूबिक सिम्फिसिस (कमर के नीचे दोनों पैरों को जोड़ने वाली हड्डी) टूटने का किया सफल ऑपरेशन | Prabhat Khabar Network

ओडिशा में हाइवा दुर्घटना के बाद एमजीएम अस्पताल के डॉक्टरों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत युवक की जटिल पेल्विक सर्जरी कर उसे नई जिंदगी दी है.

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वरीय संवाददाता, जमशेदपुर

एमजीएम अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग के डॉक्टरों ने शुक्रवार को प्यूबिक सिम्फिसिस (पेल्विक जोड़) टूटने और अलग होने (डायस्टेसिस) जैसी जटिल चोट का सफल ऑपरेशन कर एक युवक को नयी जिंदगी दी है. आयुष्मान भारत योजना के तहत यह पूरी सर्जरी नि:शुल्क की गयी. फिलहाल मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है.डुमरिया के काटाकाटी निवासी 32 वर्षीय महेश्वर पेशे से हाइवा चालक है.

बीते 27 मई को ओडिशा के अंगुल के पास हाइवा की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया था. दुर्घटना में उसके पेल्विक जोड़ की हड्डियां बीच से अलग हो गयी थीं, जिससे उसका चलना-फिरना पूरी तरह बंद हो गया था. कई अस्पतालों में इलाज का प्रयास करने के बाद भी सफलता नहीं मिलने पर परिजन उसे एमजीएम अस्पताल लेकर पहुंचे. एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ बलराम झा के निर्देश पर ऑर्थो विभाग के एचओडी डॉ वाई सांगा के नेतृत्व में ऑर्थो और एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित की गयी. डॉ वाई सांगा ने बताया कि आमतौर पर ऐसे मामलों में तीन सप्ताह के भीतर ऑपरेशन करना जरूरी होता है, लेकिन मरीज करीब डेढ़ महीने तक अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा. पुराना मामला होने के कारण ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा था, लेकिन टीम ने इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया. उन्होंने बताया कि इसके लिए पहले एक्स-रे और सीटी स्कैन के माध्यम से जोड़ के खिसकने की सटीक माप की गयी. उसके बाद हड्डियों को उसकी सही जगह पर लाया गया और धातु की मजबूत प्लेट व स्क्रू की मदद से उसे स्थायी रूप से स्थिर कर दिया गया.

निजी अस्पताल में दो लाख रुपये होता खर्च

डॉक्टरों के अनुसार, निजी अस्पतालों में इस तरह के जटिल और एडवांस ऑपरेशन के लिए कम से कम 2 लाख रुपये का खर्च आता है. लेकिन, एमजीएम अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत गरीब मरीज का यह सफल ऑपरेशन बिल्कुल मुफ्त किया गया. ऑपरेशन के बाद अब फिजियोथेरेपी के जरिये मरीज के कूल्हे की ताकत और गति को वापस लाने का प्रयास किया जायेगा.


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