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14 दिन बाद सुरक्षित लौटे जमशेदपुर के युवा कारोबारी कैरव गांधी, अपहरणकर्ता अब भी पुलिस की पकड़ से दूर

Updated at : 27 Jan 2026 7:15 PM (IST)
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कैरव गांधी के बारे में जानकारी देते एसएसपी पीयूष पांडेय और सिटी एसपी कुमार शिवाशीष

कैरव गांधी के बारे में जानकारी देते एसएसपी पीयूष पांडेय और सिटी एसपी कुमार शिवाशीष

Kairav ​​Gandhi Kidnapping Case: 14 दिनों के बाद जमशेदपुर के युवा कारोबारी कैरव गांधी सुरक्षित घर वापस आ गए. 13 जनवरी को उनका अपहरण हो गया था.

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Kairav ​​Gandhi Kidnapping Case: जमशेदपुर के बिष्टुपुर सीएच एरिया निवासी युवा कारोबारी कैरव गांधी 14 दिनों बाद मंगलवार की तड़के सुबह करीब 4 बजे सुरक्षित अपने घर लौट आए. कैरव के सुरक्षित लौटने पर पिता देवांग गांधी समेत पूरे परिवार ने राहत की सांस ली. एसएसपी पीयूष पांडेय और सिटी एसपी कुमार शिवाशीष स्वयं कैरव गांधी को लेकर उनके घर पहुंचे और परिजनों को सौंपने के बाद वापस लौट गए. पिछले 14 दिनों से मुरझाए घर के माहौल में कैरव की सुरक्षित वापसी से खुशियां लौट आईं. कैरव की वापसी के मामले में एसएसपी पीयूष पांडेय ने पत्रकारों को बताया कि 13 जनवरी को घर के पास से ही बदमाशों ने कैरव गांधी का अपहरण कर लिया था. इसके बाद एसआईटी की अलग-अलग टीमें बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में लगातार छापेमारी कर रही थीं. इसी दौरान 26 जनवरी को अपहरणकर्ताओं के एक फोन कॉल की जानकारी मिली, जिसमें वे कैरव गांधी को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट करने की बात कर रहे थे. इसके बाद एसआईटी और अधिक सक्रिय हो गई और झारखंड के विभिन्न जिलों में पुलिस की चेकिंग बढ़ा दी गई.

पकड़े जाने के डर से कैरव को छोड़ा

पुलिस की बढ़ती सक्रियता और पकड़े जाने के डर से अपराधियों ने सोमवार की रात बरही-चौपारण मार्ग पर कैरव गांधी को कार से उतार दिया और मौके से फरार हो गए. इसके बाद पुलिस की टीम ने कैरव गांधी को सुरक्षित उनके घरवालों को सौंप दिया. एसएसपी पीयूष पांडेय ने बताया कि फिलहाल कैरव गांधी से ज्यादा बातचीत नहीं हो सकी है. अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. अपहरणकर्ताओं की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उन्हें पुलिस की गिरफ्त में लिया जाएगा.

इंडोनेशिया के नंबर से आए कई बार कॉल

कैरव गांधी की कार पुलिस और परिजनों ने कांडरबेड़ा में एनएच किनारे एक सुनसान स्थान से बरामद की थी. कार में चालक की सीट के नीचे चाभी रखी हुई मिली थी. पुलिस ने कार को जब्त कर थाने ले गई थी. अपहरण के बाद अपराधियों ने इंडोनेशिया के नंबर से व्हाट्सएप के जरिए कैरव गांधी के पिता देवांग गांधी को 14 बार और चाचा प्रशांत गांधी को तीन बार कॉल किया था, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. पुलिस लिखे वाहन से किया गया अपहरण एसएसपी पीयूष पांडेय ने बताया कि कैरव गांधी के अपहरण के लिए अपराधियों ने जिस वाहन का इस्तेमाल किया था, उस पर ‘पुलिस’ लिखा हुआ था, ताकि वे किसी को शक न हो. जिस कार की नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया गया था, उस वाहन मालिक से भी पूछताछ की गई, लेकिन अपहरण में उसकी संलिप्तता नहीं पाई गई. अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा.

4 से 5 की संख्या में थे अपहरणकर्ता

उन्होंने बताया कि 13 जनवरी को घर से निकलने के बाद रास्ते में ही अपहरणकर्ताओं ने कैरव को अपने कब्जे में ले लिया था. अपहरणकर्ताओं की संख्या चार से पांच थी. वे कैरव की कार को कांडरबेड़ा में छोड़कर अपनी कार से उन्हें साथ ले गए थे. इस दौरान कैरव की आंखों पर पट्टी बांध दी गई थी, जिससे उन्हें यह पता नहीं चल सका कि उन्हें किस स्थान पर ले जाया गया.

लोकल लिंक की तलाश में पुलिस

लोकल लिंक की तलाश जारी एसएसपी पीयूष पांडेय ने बताया कि इस अपहरण कांड में लोकल लिंक की भी तलाश की जा रही है, जिसने कैरव गांधी से संबंधित जानकारी अपहरणकर्ताओं को उपलब्ध कराई थी. उस व्यक्ति को पकड़ने के लिए अलग से टीम गठित की गई है.

फिरौती की मांग की जानकारी नहीं

फिरौती की रकम की जानकारी नहीं एसएसपी ने बताया कि अपहरण के बाद अपराधियों ने फिरौती के रूप में कितनी रकम मांगी थी, इसकी फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है. इस मामले में कैरव के परिजन भी ज्यादा जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं.

हाथ जोड़ पिता-पुत्र ने जताया आभार

हाथ जोड़कर पिता-पुत्र ने जताया आभार 14 दिनों बाद सकुशल घर वापसी के बाद मंगलवार को देवांग गांधी के घर पर परिजन, राजनीतिक दलों के नेता, विधायक सरयू राय, चैंबर ऑफ कॉमर्स, एसिया के पदाधिकारी, देवांग गांधी की कंपनी के कर्मचारी समेत अन्य लोगों का आना-जाना सुबह से ही शुरू हो गया. हालांकि कैरव गांधी ने किसी से मुलाकात नहीं की. घरवालों ने बताया कि लौटने के बाद कैरव गांधी अपने कमरे में आराम कर रहे हैं. सुबह करीब 10 बजे कैरव गांधी अपने पिता देवांग गांधी के साथ घर की बालकनी में आए. दोनों ने हाथ जोड़कर सभी का धन्यवाद किया, लेकिन पत्रकारों के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया. महज दो मिनट बालकनी में रुकने के बाद दोनों अंदर चले गए.

कैरव के साथ नहीं किया गया कोई गलत व्यवहार

अपहरण के बाद सुरक्षित स्थान पर रखा गया था कैरव एसएसपी पीयूष पांडेय ने बताया कि अपहरण के बाद कैरव गांधी को एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया था, लेकिन उस स्थान का अब तक पता नहीं चल सका है. पुलिस के दबाव के कारण अपराधियों ने कैरव को दूसरी जगह ले जाने की योजना बनाई थी. हालांकि अपहरण के दौरान अपराधियों ने कैरव गांधी के साथ कोई गलत व्यवहार नहीं किया.

कैरव गांधी अपहरण और सुरक्षित वापसी: घटनाक्रम की टाइमलाइन

  • 13 जनवरी (दोपहर करीब 1:00 बजे): युवा कारोबारी कैरव गांधी बिष्टुपुर सीएच एरिया स्थित अपने घर से निकले. इसके कुछ ही मिनटों बाद बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया.
  • 13 जनवरी (अपहरण के तुरंत बाद): पुलिस और परिजनों को कैरव की कार कांडरबेड़ा में एनएच किनारे लावारिस हालत में मिली. कार की चाभी चालक की सीट के नीचे रखी हुई थी.
  • 13 जनवरी से 25 जनवरी के बीच:
    • एसआईटी (SIT) की अलग-अलग टीमों ने बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में सघन छापेमारी की.
    • अपराधियों ने इंडोनेशिया के नंबर से व्हाट्सएप के जरिए कैरव के पिता को 14 बार और चाचा को 3 बार कॉल किया.
  • 26 जनवरी: पुलिस को अपहरणकर्ताओं के एक फोन कॉल की गुप्त सूचना मिली, जिसमें वे कैरव को किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की योजना बना रहे थे. इसके बाद पुलिस ने झारखंड के विभिन्न जिलों में चेकिंग और सुरक्षा बढ़ा दी.
  • 26 जनवरी (सोमवार की रात): पुलिस के बढ़ते दबाव और पकड़े जाने के डर से अपराधियों ने कैरव गांधी को बरही-चौपारण मार्ग पर कार से उतार दिया और खुद फरार हो गए.
  • 27 जनवरी (मंगलवार, सुबह करीब 4:00 बजे): कैरव गांधी सुरक्षित अपने घर पहुंचे. एसएसपी और सिटी एसपी स्वयं उन्हें लेकर परिजनों के पास पहुंचे.
  • 27 जनवरी (मंगलवार, सुबह 10:00 बजे): 14 दिनों के लंबे इंतजार के बाद कैरव अपने पिता के साथ घर की बालकनी में आए और हाथ जोड़कर शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया.

वर्तमान स्थिति: पुलिस ने अपराधियों की पहचान कर ली है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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