लगातार बारिश ने तोड़ी किसानों की कमर, धान का बिचड़ा और सब्जियां बर्बाद

खेत में खड़ा किसान बता रहा है कि बिचड़ा डूब गया है. फोटो : प्रभात खबर
Heavy Rain in East Singhbhum: पूर्वी सिंहभूम जिले में लगातार बारिश का असर सब्जी उत्पादन पर भी पड़ा है. जिले में करीब 3000 हेक्टेयर भूमि पर भिंडी, लौकी, करेला, तोरई, खीरा, बैंगन आदि की खेती की जा रही है. बीते चार दिनों की बारिश से इनमें से करीब 10 से 15% फसल के प्रभावित होने की आशंका है. विशेषकर उन क्षेत्रों में नुकसान की आशंका अधिक है, जहां हाल में ही बिचड़ा डाला गया या नए पौधों की रोपाई की गयी थी.
Heavy Rain in East Singhbhum: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में पिछले 4-5 दिनों से लगातार हो रही तेज बारिश ने जिले के किसानों की कमर तोड़ दी है. पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा, चाकुलिया, धालभूमगढ़, डुमरिया, पटमदा, बोड़ाम सहित अन्य किसान बहुल क्षेत्रों में धान की खेती और सब्जी उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. जिले में धान के लगभग 25% बिचड़े जलजमाव की भेंट चढ़ चुके हैं. बिचड़ा गलने से हजारों किसान हताश हैं. अधिकांश किसान दोबारा बिचड़ा डालने का साहस नहीं जुटा पा रहे, जबकि कुछ फिर से बीज डालने की कोशिश में जुटे हैं. कृषि विभाग नुकसान का आकलन करने में जुटा है.
लगातार बारिश से किसानों के खेतों में भरा पानी
किसानों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है. इससे बिचड़ा सड़ रहा है. लेवा पद्धति से बीज डालना मजबूरी बन चुका है, लेकिन इससे उपज की गुणवत्ता और मात्रा दोनों प्रभावित होती है. किसानों ने बताया कि सूखे खेतों में बिचड़ा डालना बेहतर होता है, परंतु जल निकासी के अभाव में खेतों में पानी भर गया है.

सब्जी उत्पादन को भी झटका
लगातार बारिश का असर सब्जी उत्पादन पर भी पड़ा है. जिले में करीब 3000 हेक्टेयर भूमि पर भिंडी, लौकी, करेला, तोरई, खीरा, बैंगन आदि की खेती की जा रही है. बीते चार दिनों की बारिश से इनमें से करीब 10 से 15% फसल के प्रभावित होने की आशंका है.
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नये पौधों की रोपाई वाले क्षेत्र में ज्यादा नुकसान की आशंका
हालांकि, अब तक उद्यान विभाग को किसी किसान द्वारा औपचारिक क्षति की सूचना नहीं मिली है. फिर भी विभाग संभावित क्षति को ध्यान में रखते हुए सतत निगरानी कर रहा है. विशेषकर उन क्षेत्रों में नुकसान की आशंका अधिक है, जहां हाल में ही बिचड़ा डाला गया या नए पौधों की रोपाई की गयी थी.
विभिन्न क्षेत्रों से रिपोर्ट मिली है. लगभग 15% सब्जियों के नष्ट होने की संभावना है. हालांकि आधिकारिक आंकड़ा संकलन प्रक्रिया में है.
अनिमा लकड़ा, जिला उद्यान पदाधिकारी
लगातार बारिश का असर बिचड़े पर पड़ा है. नुकसान का आकलन प्रखंड से रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो पाएगा.
विवेक बरुआ, जिला कृषि पदाधिकारी
फसल आच्छादन की स्थिति (1 जून से 1 जुलाई तक)
| फसल | लक्ष्य (हेक्टेयर) | आच्छादन(हेक्टेयर) | प्रतिशत |
| धान | 1,10,000 | 148 | 0.13 |
| मक्का | 11,820 | 116 | 0.98 |
| दलहन | 22,200 | 100 | 0.45 |
| तिलहन | 2,650 | 0 | 0 |
| मोटे अनाज | 1,190 | 0 | 0 |
| कुल योग | 1,47,860 | 364 | 0.25 |
बारिश के आंकड़े (1 जून से 1 जुलाई 2025 तक)
| विवरण | आंकड़े |
| सामान्य वर्षापात | 242.4 मिलीमीटर |
| वास्तविक वर्षापात | 650.3 मिलीमीटर |
| अतिरिक्त वर्षा | 168 प्रतिशत अधिक |
पूर्वी सिंहभूम में प्रखंडवार बारिश की स्थिति
| प्रखंड का नाम | वर्षापात |
| जमशेदपुर | 592.2 मिलीमीटर |
| पोटका | 542.8मिलीमीटर |
| पटमदा | 637.4 मिलीमीटर |
| बोड़ाम | 640.0 मिलीमीटर |
| मुसाबनी | 421.8 मिलीमीटर |
| डुमरिया | 560.4 मिलीमीटर |
| घाटशिला | 689.2 मिलीमीटर |
| धालभूमगढ़ | 589.2 मिलीमीटर |
| चाकुलिया | 562.0 मिलीमीटर |
| बहरागोड़ा | 670.8 मिलीमीटर |
| गुड़ाबांधा | 683.6 मिलीमीटर |
| औसत वर्षा | 600.6 मिलीमीटर |
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By Mithilesh Jha
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