साइबर ठग ने दो साल में बनायी करोड़ों की संपत्ति, कोलकाता से हुआ गिरफ्तार

Updated at : 05 Nov 2020 7:57 AM (IST)
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साइबर ठग ने दो साल में बनायी करोड़ों की संपत्ति, कोलकाता से हुआ गिरफ्तार

दो साल में बनायी करोड़ों की संपत्ति कमाने वाला साइबर ठग कोलकाता से गिरफ्तार

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जमशेदपुर : मानगो स्थित एसडीएम स्कूल से 10वीं करने के बाद शंकोसाई के राहुल केसरी ने गूगल से देश-विदेश की कंपनियों का लोगो बनाकर आम लोगों से ठगी कर दो साल में करोड़ों की कमाई कर ली है. 29 वर्षीय राहुल ने अब एक नयी कंपनी भी बना ली, जिसकी वार्षिक आय 35 हजार करोड़ होनेवाली थी.

इसकी रूपरेखा उसने तैयार कर ली थी. लेकिन इसी बीच बिष्टुपुर साइबर थाने की पुलिस ने कोलकाता के न्यू टाउन थाना अंतर्गत संजीवा गार्डेन से गिरफ्तार कर लिया. एसएसपी ने बताया कि बिष्टुपुर साइबर थाने में उसके खिलाफ चार अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हैं. राहुल यूके का सिम इस्तेमाल करता था, इसके जरिये वह लोगों का डाटा चोरी करता था. उसने अबतक करीब 600 लोगों से ठगी की है.

लैपटॉप, टैब, मोबाइल सहित थाइलैंड का पासपोर्ट जब्त : पुलिस ने आरोपी राहुल के पास से एक लैपटॉप, एक टैब, दो मोबाइल, एक पैन ड्राइव, चार एटीएम कार्ड, एक पैन कार्ड और पासपोर्ट बरामद किया है. पासपोर्ट थाइलैंड का है.

गिरोह में अन्य लोग भी हैं शामिल :

एसएसपी ने बताया कि गिरोह में राहुल केसरी के अलावा महेश पोद्दार, राहुल मिश्रा, मंतोष पोद्दार, योगेश शर्मा, राकेश महतो और धीरज कुमार शामिल हैं. गिरोह का सरगना राहुल केसरी था. वर्ष 2009 में उसने गूगल पर नकली लोगो बनाने का काम सीखा. करीब नौ वर्षों तक उसने गूगल पर फर्जीवाड़ा करना सीखा. इस बीच वह छोटा-मोटा फर्जीवाड़ा करता था.

इसके बाद उसने स्कूल के साथी शंकोसाई के महेश पोद्दार को अपना सहयोगी बनाया और उसे 50,000 रुपये देता था. धीरे-धीरे उसने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था. मानगो में उसने एक कार्यालय भी खोल रखा था. महेश पोद्दार की गिरफ्तारी के पास उसने कार्यालय बंद कर दिया.

बैंकॉक में रखा है मकान देता है “60 हजार किराया

एसएसपी डॉ एम तमिलवाणन ने बताया कि आरोपी ने बैंकॉक में एक किराये का मकान भी रखा है, जिसका हर माह वह 60,000 रुपये किराया देता है. साथ ही उसने दो फर्जी ई-कॉमर्स कंपनी साइडसीपी और फर्स क्लाउड खोल रखी है, जिसके माध्यम से वह लोगों को सस्ते दाम पर सामान बेचता था. वह लोगों को झांसा में लेकर सामान खरीदवाता था और फिर नकली सामान भेज रुपये वापस करने के नाम पर खाते की जानकारी लेकर रुपये की निकासी कर लेता था.

वर्ष 2007 में दी थी मैट्रिक की परीक्षा

एसएसपी ने बताया कि राहुल ने मानगो स्थित एसडीएम स्कूल से वर्ष 2007 में मैट्रिक की परीक्षा पास की थी. इसके बाद वह कोलकाता में एक कंपनी में कंप्यूटर ऑपरेटर का काम करता था. वह अपने दादा-दादी के साथ कोलकाता में रहता था.

posted by : sameer oraon

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