12 साल में ही बर्बाद हो गईं सरकारी बसें, सड़क पर दौड़ रही सिदगोड़ा डिपो से गायब कंडम घोषित 5 सिटी बस

Updated at : 11 Sep 2023 3:42 PM (IST)
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12 साल में ही बर्बाद हो गईं सरकारी बसें, सड़क पर दौड़ रही सिदगोड़ा डिपो से गायब कंडम घोषित 5 सिटी बस

वर्ष 2010 में स्वराज माजदा की 50 बसों की खरीदारी की गयी थी. बाद में पूर्व मोटर यान निरीक्षक (एमवीआइ ) विमल कुमार सिंह ने सिदगोड़ा डिपो में खड़ी बसों की जांच कर रिपोर्ट जमशेदपुर अक्षेस के पूर्व विशेष पदाधिकारी संजय कुमार को सौंपी थी.

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जमशेदपुर, अशोक झा : जमशेदपुर में ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त रखने के साथ-साथ आमलोगों को बेहतर ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा के लिए सिटी बस सेवा की योजना बनायी गयी थी. 5 करोड़ 50 लाख रुपये में साल 2010 में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत 50 बसें खरीदी गयीं. लेकिन बिना उपयोग मेंटेनेंस के अभाव में बसें कबाड़ हो गयीं. जर्जर बसों के बचे-खुचे पार्ट्स भी चोरी हो गये. यही नहीं, सिदगोड़ा डिपो से कंडम घोषित पांच बसें गायब हो गयीं.

बिना फिटनेस, इंश्योरेंस दौड़ रहीं बसें

डिपो से गायब सिटी बसें जमशेदपुर की सड़कों पर बिना फिटनेस, इंश्योरेंस दौड़ रही हैं, लेकिन जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति के अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं है. ये बसें पिछले कई माह से सिदगोड़ा डिपो से गायब हैं. अखिर इन सिटी बसों के परिचालन से जमशेदपुर अक्षेस की जगह किसकी जेब में पैसा जा रहा है? यह जांच का विषय है. डिपो में खड़ी ज्यादातर बसों से समान गायब हो गये हैं.

कंडम घोषित सिटी बसों के गायब होने और इनके सड़क पर परिचालन की जानकारी मिली है. इसकी जांच करायी जायेगी.

पीयूष सिन्हा, उप प्रशासक जमशेदपुर अक्षेस

खरीदी गयी थीं स्वराज माजदा की 50 बसें

साल 2010 में स्वराज माजदा की 50 बसों की खरीदारी की गयी थी. बाद में पूर्व मोटर यान निरीक्षक ( एमभीआइ ) विमल कुमार सिंह ने जमशेदपुर के सिदगोड़ा डिपो में खड़ी बसों की जांच कर रिपोर्ट जमशेदपुर अक्षेस के पूर्व विशेष पदाधिकारी संजय कुमार को सौंपी थी. रिपोर्ट में बताया कि इन बसों को नियमानुसार कंडम किया जा सकता है. जमशेदपुर अक्षेस ने मोटर यान निरीक्षक से बसों के परिचालन को लेकर रिपोर्ट मांगी थी.

2017 के बाद बसों का फिटनेस, इंश्योरेंस नहीं

शहर की सड़कों पर अनफिट वाहन दौड़ रहे हैं. सिटी बसों के रजिस्ट्रेशन नंबरों के आधार पर परिवहन विभाग की वेबसाइट पर सिटी बसों की फिटनेस व बीमा की जांच की, तो पता चला कि 26 फरवरी 2017 के बाद से ही इन सिटी बसों का टैक्स, फिटनेस, इंश्योरेंस नहीं कराया गया है. अगर इन वाहनों से दुर्घटना होती है, तो जिम्मेदार कौन होगा? यह बताने को काेई तैयार नहीं है.

इन मार्ग पर चल रहीं बसें

प्रभात खबर पड़ताल में पता चला कि एक सिटी बस साकची से सुंदरनगर मार्ग पर, दो बसें घाटशिला मार्ग पर चल रही हैं. वहीं एक बस जेपी सेतु बस पड़ाव में लावारिस हालात में खड़ी हैं, जिसका स्टेयरिंग, गेयर बॉक्स, टेल्कॉन, सीट, बैटरी सहित अन्य कीमती समान गायब हो गये हैं.

2010 में खरीद, 2022 में घोषित कर दी कंडम

  • 21 दिसंबर 2009 को नगर विकास विभाग ने 5 करोड़ 50 लाख से 50 बसों को खरीदने का निर्णय लिया

  • 1 सितंबर 2010 को 50 सिटी बसें जेटीडीसी को हस्तांरित कर दी गयी

  • 28 अगस्त 2014 को नगर बस सेवा नगर विकास विभाग को सौंपा

  • 13 सितंबर 2014 को जर्जर बसें जेएनएसी को वापस कर दी गयी

  • 2015 अक्तूबर में 12 बसें राधवेंद्र प्रताप सिंह और भोला गुप्ता को 38 बसें आवंटित की गयी, कुछ दिन बाद ही दोनों संवेदक ने इन बसों को वापस कर दिया

  • 21 सितंबर 2022 को एमवीआइ ने जांच कर बसों को कंडम घोषित कर दिया

  • साल 2017 से इन बसों के टैक्स का भुगतान नहीं किया गया है

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