भिलाई पहाड़ी के ठेका मजदूरों की समस्याएं 15 दिन में दूर नहीं हुई, तो होगा आंदोलन

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आदिवासी छात्र एकता का एक प्रतिनिधिमंडल कंपनी प्रबंधन से मिला | Prabhat Khabar Network

आदिवासी छात्र एकता का एक प्रतिनिधिमंडल कंपनी प्रबंधन से मिला | Prabhat Khabar Network

भिलाई पहाड़ी स्थित त्रिवेणी अर्थमूवर्स के ठेका मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर प्रबंधन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है. मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी.

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जमशेदपुर. भिलाई पहाड़ी स्थित त्रिवेणी अर्थमूवर्स कंपनी में कार्यरत ठेका मजदूरों के वेतन, सेवा सुरक्षा, पदोन्नति और श्रम अधिकारों की अनदेखी को लेकर आदिवासी एकता मंच ने कंपनी प्रबंधन को पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा. इस दौरान मंच के अध्यक्ष दीनबंधु सिंह, छोटू सोरेन, मंगल टुडू, राखाल सोरेन, राजाराम मुर्मू, मुन्ना सबर, पंचायत प्रतिनिधि शशि सिंह सरदार, धनंजय सिंह सरदार व श्रवण सिंह सरदार ने कंपनी प्रबंधन से बातचीत की. सौंपे गये मांग पत्र में कहा गया है कि वर्षों से निष्ठापूर्वक सेवा दे रहे मजदूरों के योगदान से कंपनी प्रगति कर रही है, लेकिन उन्हें मूलभूत सुविधाओं, समय पर पदोन्नति और सेवा स्थायीकरण के लाभ से वंचित रखा जा रहा है. ठेका मजदूरों के साथ अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. आदिवासी एकता मंच ने चेतावनी दी है कि 15 दिनों के अंदर मजदूरों की समस्या का हल निकालने की दिशा में उचित पहल की जाये, अन्यथा मजदूर आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे.

मजदूरों की प्रमुख मांगें

5 वर्ष से अधिक सेवा देने वाले मजदूरों को कंपनी पे-रोल पर लिया जाये तथा 10 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत मजदूरों को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाये.

3 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत योग्य और अनुभवी अर्द्धकुशल मजदूरों को कुशल श्रेणी में प्रोन्नति कर उसी अनुरूप वेतन दिया जाये-सभी ठेका मजदूरों को समान अवसर देते हुए पारदर्शी तरीके से ओवरटाइम दिया जाये और नियमानुसार भुगतान किया जाये.

मजदूरों को न्यूनतम 8.33 प्रतिशत से अधिक बोनस प्रदान किया जाये.- आकस्मिक, बीमारी, साप्ताहिक व राष्ट्रीय अवकाशों का पूरा लाभ दिया जाये.


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दशमत सोरेन

लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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