मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से टूटी माओवाद की कमर, इन बड़ी घटनाओं को दिया था अंजाम

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मिसिर बेसरा गिरफ्तार: लाल आतंक का अंत?

शीर्ष नक्सली मिसिर बेसरा की एआई जेनरेटेड तस्वीर.

झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 26 वर्षों से दहशत का पर्याय रहे माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा को सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार कर लिया है. इस गिरफ्तारी को नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे लाल आतंक का सफाया होने की उम्मीद है.

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प्रभात खबर टीम

झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के दुर्गम जंगलों में करीब 25-26 वर्षों तक दहशत का पर्याय रहे एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलता मान रही हैं. सुरक्षा अधिकारियों का दावा है कि बेसरा की गिरफ्तारी के साथ ही भाकपा (माओवादी) के संगठनात्मक ढांचे को सबसे बड़ा झटका लगा है और सारंडा व कोल्हान के जंगलों से लाल आतंक का लगभग पूरी तरह सफाया हो चुका है.

जानकारी के अनुसार संगठन का शेष नेतृत्व अब सीमित क्षेत्रों में सिमट गया है. माओवादी कमांडर असीम मंडल और उसका दस्ता दलमा तथा आसपास के सुरक्षित जंगलों की ओर खिसक गया है. लगातार चल रहे संयुक्त अभियानों, आधुनिक ड्रोन और सैटेलाइट इमेजिंग तकनीक के इस्तेमाल तथा बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण के कारण संगठन का नेटवर्क तेजी से कमजोर हुआ है.

परिवार से मिलने जा रहा था, तभी दबोचा गया

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार अपने अंतिम दौर में संगठन के बिखरने, साथियों के मारे जाने और लगातार बढ़ते दबाव के बीच मिसिर बेसरा अपने पैतृक गांव परिवार से मिलने जा रहा था. इसी दौरान खुफिया इनपुट के आधार पर सुरक्षा बलों ने उसे गिरफ्तार कर लिया. वर्षों से फरार चल रहे इस शीर्ष कमांडर की गिरफ्तारी को नक्सल विरोधी अभियान का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है.

सेरेंगदा से शुरू हुई थी खून-खराबे की कहानी

पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में माओवाद की शुरुआत वर्ष 2000 के दिसंबर में सेरेंगदा के जंगलों से हुई थी. उस समय एमसीसी और बाद में भाकपा (माओवादी) ने धीरे-धीरे अपने पैर पसारने शुरू किये. इसके बाद लगभग ढाई दशक तक यह इलाका सुरक्षा बलों और स्थानीय ग्रामीणों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में शामिल रहा.

2004 का हमला बना मिसिर बेसरा के उदय की वजह

साल 2004 में बालिबा और बिटकिलसोय क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर हुआ हमला पश्चिमी सिंहभूम के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है. घात लगाकर किये गये इस हमले में आइईडी विस्फोट के जरिए 29 से अधिक पुलिसकर्मी शहीद हो गये थे. जांच एजेंसियों के अनुसार इस हमले का मास्टरमाइंड मिसिर बेसरा था. इसी घटना के बाद संगठन में उसका कद तेजी से बढ़ा और वह शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया.

राजनीति विज्ञान का छात्र बना खूंखार नक्सली कमांडर

मिसिर बेसरा का जन्म वर्ष 1960 में गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के मदनाडीह गांव में हुआ था. उसने राजनीति विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की थी.

संगठन में वह भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य, केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य और ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहा. झारखंड सरकार ने उस पर एक करोड़ रुपये, जबकि ओडिशा सरकार ने 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में उसके खिलाफ 150 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

2007 में गिरफ्तारी, 2009 में कोर्ट से छुड़ाकर ले गये माओवादी

सितंबर 2007 में खूंटी पुलिस ने पहली बार मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया था. लेकिन जून 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट में पेशी के दौरान करीब 30 हथियारबंद माओवादियों ने कोर्ट परिसर पर हमला कर दिया. पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग और बमबारी के बीच माओवादी उसे छुड़ाकर ले गये. इस हमले में एक पुलिसकर्मी शहीद हो गया था. इसके बाद बेसरा करीब दो दशक तक भूमिगत रहा.

2020 के बाद बदली रणनीति, टूटने लगा माओवादी नेटवर्क

वर्ष 2020 के बाद झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सल विरोधी अभियान की रणनीति पूरी तरह बदल दी. सारंडा, महादेवशाल, कुइड़ा, आराहसा सहित कई संवेदनशील इलाकों में नये सुरक्षा कैंप स्थापित किये गये.

कोबरा बटालियन, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर ने ड्रोन, सैटेलाइट इमेजिंग और आधुनिक निगरानी तकनीक की मदद से जंगलों में लगातार अभियान चलाया. परिणामस्वरूप नक्सलियों के ठिकाने ध्वस्त हुए, बड़ी संख्या में हथियार बरामद हुए और संगठन का नेटवर्क बिखरने लगा.

सिंहभूम में बेसरा गिरोह की प्रमुख वारदातें

2022 : पूर्व विधायक पर हमला

गोइलकेरा थाना क्षेत्र के झीलरुवां में फुटबॉल प्रतियोगिता के दौरान पूर्व विधायक गुरुचरण नायक पर हमला किया गया, जिसमें उनके दो अंगरक्षक मारे गये.

मार्च 2023 : विस्फोटकों की बड़ी लूट

बड़ा जामदा ओपी क्षेत्र के मेरलगड्ढा और बालजोड़ी स्थित मैगजीन से करीब 7000 डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक लूट लिये गये.

अगस्त 2023 : तुंबाहाका मुठभेड़

टोंटो थाना क्षेत्र के तुंबाहाका जंगल में हुई भीषण मुठभेड़ में झारखंड जगुआर के दो जवान शहीद हो गये.

2023 से 2025 : लगातार आइईडी हमले

लोवाबेड़ा, राजाबासा, बालिबा, मरांगपोंगा और रातामाटी समेत कई इलाकों में सुरक्षा बलों पर आइईडी हमले किये गये, जिनमें कोबरा, सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस के कई अधिकारी एवं जवान शहीद हुए तथा कई गंभीर रूप से घायल हुए.

मिसिर बेसरा : एक नजर में

बिंदुविवरण
पूरा नाममिसिर बेसरा
उपनामसागर दा, भास्कर दा, सुनिर्मल दा, प्रधान दा
जन्म1960
मूल निवासीमदनाडीह, पीरटांड़, गिरिडीह
शिक्षाराजनीति विज्ञान में स्नातक एवं स्नातकोत्तर
संगठन में पदपोलित ब्यूरो सदस्य, केंद्रीय सैन्य आयोग सदस्य, ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो प्रमुख
घोषित इनामझारखंड - 1 करोड़ रुपये, ओडिशा - 1.20 करोड़ रुपये
दर्ज मामलेचार राज्यों में 150 से अधिक गंभीर मामले

नक्सल विरोधी अभियान के लिए बड़ी उपलब्धि

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी केवल एक शीर्ष कमांडर की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूर्वी भारत में माओवादी संगठन के सबसे मजबूत नेटवर्क के विघटन का संकेत है. पिछले कुछ वर्षों में लगातार अभियान, आत्मसमर्पण और आधुनिक तकनीक आधारित कार्रवाई के कारण सारंडा और कोल्हान जैसे कभी नक्सलियों के सबसे सुरक्षित गढ़ माने जाने वाले इलाके अब सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं. यदि यही रणनीति आगे भी जारी रही, तो शेष बचे माओवादी नेटवर्क को भी पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में सुरक्षा बलों को निर्णायक सफलता मिल सकती है.

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अमलेश नंदन सिन्हा

लेखक के बारे में

By अमलेश नंदन सिन्हा

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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