जमशेदपुर के बारीगोड़ा-गोविंदपुर के लोगों के लिए खुशखबरी, रेलवे फाटक पर जल्द बनेगा ओवरब्रिज

Updated at : 14 Feb 2026 8:19 AM (IST)
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Tatanagar Asanboni Railway Station

जमशेदपुर का टाटानगर और आसनबोनी रेलवे स्टेशन.

Jamshedpur Railway News: झारखंड के जमशेदपुर के बारीगोड़ा और गोविंदपुर में रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का रास्ता साफ. टाटानगर-आसनबोनी सेक्शन में फाटक 137 और 138 पर 100% रेलवे खर्च से बनेगा आरओबी. सांसद बिद्युत बरण महतो के प्रयास से लाखों लोगों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद है. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

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जमशेदपुर से संजीव भारद्वाज की रिपोर्ट

Jamshedpur Railway News: जमशेदपुर के बारीगोड़ा और गोविंदपुर के लोगों के लिए एक खुशखबरी है. वह यह है कि टाटानगर और आसनबोनी रेलवे स्टेशन के बीच दो सबसे व्यस्त फाटकों पर प्रस्तावित रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण अब खुर रेलवे कराएगा. इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी जमशेदपुर के सांसद बिद्युत बरण महतो ने दी है. रेलवे ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है कि अब इन परियोजनाओं में राज्य सरकार की वित्तीय भागीदारी का इंतजार नहीं किया जाएगा और 100% रेलवे के खर्च से ही इनका निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा.

रेल मंत्री के हस्तक्षेप से सुलझा वर्षों पुराना मामला

वर्तमान बजट सत्र के दौरान सांसद बिद्युत बरण महतो ने नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री से विशेष मुलाकात की थी. इस दौरान सांसद ने बारीगोड़ा (फाटक संख्या 138) और गोविंदपुर (फाटक संख्या 137) के रेलवे ओवरब्रिज निर्माण में हो रहे अत्यधिक विलंब और इसके कारण आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के प्रति अपनी गंभीर चिंता जताई थी. सांसद ने रेल मंत्री को बताया कि फाटक बंद होने के कारण न केवल रेल परिचालन प्रभावित होता है, बल्कि आम जनता को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है. मामले की गंभीरता को देखते हुए रेल मंत्री ने तत्काल अपने एजीडीपी विकास जैन को इस संदर्भ में दिशा-निर्देश दिए. इसके बाद श्री जैन ने दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्रा से वार्ता की और समस्या के निराकरण का आदेश दिया.

राज्य सरकार की उदासीनता थी बड़ी बाधा

पूर्व में इन दोनों ओवरब्रिज का निर्माण 50:50 लागत साझेदारी के आधार पर स्वीकृत किया गया था. इसके तहत आधा खर्च रेलवे और आधा राज्य सरकार को वहन करना था. सांसद महतो ने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए उन्होंने राज्य सरकार से कई बार व्यक्तिगत रूप से और पत्राचार के माध्यम से आग्रह किया, लेकिन राज्य सरकार ने इस दिशा में कोई रुचि नहीं दिखाई. चूंकि यह दक्षिण पूर्व रेलवे के ‘ए’ मार्ग का सबसे व्यस्त त्रि-लाइन (थ्री लाइन) खंड है, जहां ट्रेनों की आवाजाही की आवृत्ति बहुत अधिक है, इसलिए फाटकों के बंद रहने से स्थिति अत्यंत जटिल हो जाती थी. अंततः जनता की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए रेलवे ने इसे एकल एजेंसी के रूप में खुद निर्मित करने का फैसला किया है.

रेल परिचालन में आएगी सुगमता

रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, आसनबोनी-टाटानगर सेक्शन के ये दोनों फाटक परिचालन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं. ट्रेनों की अत्यधिक आवृत्ति और भारी सड़क यातायात के कारण इन समपार फाटकों का संचालन बहुत कठिन हो गया था, जिससे रेल परिचालन में विलंब और सड़क पर गंभीर जाम की स्थिति बनी रहती थी. अब रेलवे द्वारा शत-प्रतिशत खर्च वहन करने के निर्णय के साथ ही आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं और कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है. इसके अतिरिक्त, मकदूमपुर रेलवे गेट के निकट भी रोड ओवर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव वर्तमान में रेलवे के पास विचाराधीन है, जिस पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय होने की उम्मीद जताई जा रही है.

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लाखों की आबादी को जाम से मिलेगी मुक्ति

सांसद बिद्युत बरण महतो के इस सफल प्रयास से क्षेत्र के लाखों लोगों में खुशी की लहर है. बारीगोड़ा और गोविंदपुर क्षेत्र में घनी आबादी होने के कारण हर दिन हजारों वाहन इन फाटकों से गुजरते हैं. फाटक बंद रहने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों और नौकरीपेशा लोगों को होती थी. अब रेलवे द्वारा स्वयं निर्माण कराने के निर्णय से विभागीय तालमेल की बाधाएं समाप्त हो गई हैं और काम में तेजी आने की उम्मीद है. सांसद ने भरोसा जताया है कि दक्षिण पूर्व रेलवे जल्द ही निविदा की प्रक्रिया पूरी कर धरातल पर निर्माण कार्य शुरू कराएगा, जिससे आने वाले समय में यह क्षेत्र पूरी तरह जाम मुक्त हो जाएगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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