जमशेदपुर: लाखों की राशि खर्च करने के बाद भी सरकारी योजनाएं धरातल पर दम तोड़ रही हैं, लेकिन विभाग इसकी सुधि तक नहीं लेता. सुंदरनगर स्थित जीविका समिति ऐसी ही योजनाओं में से एक है जिसमें महिलाओं को बुनकर का प्रशिक्षण देने के लिए यहां लगाये गये लाखों रुपये की हथकरघा मशीन व उपकरण जंग लग कर बेकार हो गये.
समिति के लिए निर्माणाधीन भवन में भी लाखों खर्च हो चुके हैं लेकिन आज भी वह आधा- अधूरा हैं, जबकि समिति से जुड़ी 50 से 60 महिलाओं को न तो प्रशिक्षण मिला न रोजगार. बताया जाता है कि जिला उद्योग केंद्र की ओर से वर्ष 2007 में सुंदरनगर के आसपास की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से जीविका समिति का गठन किया गया था.
समिति के लिए एक भवन बनाने की पहल हुई जिसके लिए स्थानीय गीता देवी ने दान में 10 डिसमिल जमीन भी दी. भवन निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ था कि समिति ने काम करना शुरू कर दिया और आनन-फानन पांच से छह लाख रुपये के हथकरघा मशीन व उपकरण खरीद लिये गये. मशीन को रखने की जगह नहीं थी अत: उसे पास के एक गैरेज के पास रख दिया गया. आज सात साल बाद स्थिति यह है कि न भवन पूरा हुआ, न मशीन व उपकरण अब काम लायक रहे और न ही जीविका समिति के जुड़ी महिलाएं ही रोजी-रोजगार से जुड़ सकीं.

