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आपका घर लगे बाहर से सुंदर, भीतर से शानदार दीपावली आनी वाली है. लोग अपने घर को रंग-रोगन के साथ-साथ अंदर से भी सजाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. लोगों का मानना है कि घर बाहर से तो सुंदर होना चाहिए, लेकिन भीतर से भी कम शानदार नहीं होना चाहिये. यानी एक्सटीरियर के […]

आपका घर लगे बाहर से सुंदर, भीतर से शानदार दीपावली आनी वाली है. लोग अपने घर को रंग-रोगन के साथ-साथ अंदर से भी सजाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. लोगों का मानना है कि घर बाहर से तो सुंदर होना चाहिए, लेकिन भीतर से भी कम शानदार नहीं होना चाहिये. यानी एक्सटीरियर के साथ-साथ इंटीरियर पर भी ध्यान देने की जरूरत है. एक घर का इंटीरियर कैसा होना चाहिये और कौन-कौन से तत्व उसे खास बना सकते हैं यह जानना बहुत जरूरी है. इंटीरियर डिजाइनिंग के लेटेस्ट ट्रेंड व उससे जुड़ी अहम जानकारियों पर पेश है लाइफ @ जमशेदपुर की यह रिपोर्ट… ——————छोटे घरों में इनोवेशन की ज्यादा संभावनाएंजब बात छोटे घरों यानी टू-बीएचके व थ्री-बीएचके फ्लैट्स की हो, तो कम समय में उसकी खूबसूरती को और भी ज्यादा निखारा जा सकता है. यदि उसे सही तरीके से डिजाइन किया जाये, तो खूबसूरती निखर कर सामने आती है. कई लोग अलग-अलग कॉन्सेप्ट व इंटीरियर डिजाइनिंग में आये इनोवेशन को अपना कर अपने घरों को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रहे हैं. इनसाइड गार्डेन का कॉन्सेप्ट है नया : इंटीरियर डिजाइनर बिलाल नसीर बताते हैं कि घर की हर जगह की अपनी जरूरत होती है. इसके लिए जरूरी है कि उन जगहों का खास ख्याल रखकर उसे संवारा जाये. बिलाल बताते हैं कि मॉडर्न कॉन्सेप्ट या फिर रॉयल व ट्रेडिशनल कॉन्सेप्ट के आधार पर घर का इंटीरियर सजा सकते हैं. इस समय वॉल गॉर्डेन का लेटेस्ट ट्रेंड चला है. इसमें नेचुरल प्लांट्स दीवारों की रौनक बढ़ा रहे होते हैं. ये नॉन फ्लोरा प्लांट्स होते हैं. इन्हें हरा-भरा रहने में सूर्य की किरणों की आवश्यकता नहीं पड़ती. दीवारों की खूबसूरती बढ़ा सकती है ब्लॉकिंग इंटीरियर डिजाइनर उज्ज्वल कर्माकर बताते हैं कि दीवारों में ब्लॉकिंग हाेने से दीवारों को और भी ज्यादा खूबसूरत बनाया जा सकता है. इसमें दीवार के अंदर स्क्वायर जैसी जगह बनाकर उसमें लाइटिंग या फिर कोई मूर्ति लगायी जा सकती है. इंटीरियर डिजाइनिंग का खर्च स्थान स्पेस खर्च हॉल लगभग 200 स्कवायर फीट डेढ़ से दो लाख रुपये मॉस्टर बेड रूम लगभग 150 स्कवायर फीट लगभग एक लाख बेबी बेड रूम लगभग 120 स्कवायर फीट 50-70 हजार रुपये हॉल में सीटिंग व डायनिंग अरेंजमेंट्स का रखें खास ख्यालएक्सपर्ट बताते हैं कि टू-बीएचके या थ्री-बीएचके फ्लैट्स में स्पेस के हिसाब से इंटीरियर की प्लानिंग की जाती है. हॉल का एरिया अमूमन 200 स्कवायर फीट का होता है. इसे खूबसूरत बनाने के लिए सीटिंग एरिया, यानी सोफा के आगे एलसीडी को प्लेस किया जाये. वहीं, वॉल के स्पेस के अनुसार पोट्रेट लगायें. इसमें चाहें तो म्यूरल आर्ट भी लगा सकते हैं. लेकिन, एक से ज्यादा आर्ट एक दीवार पर न लगायें. दीवारों को खूबसूरत बनाने के लिए इनसाइड गार्डेन के कॉन्सेप्ट को भी अपना सकते हैं. दूसरी ओर डायनिंग टेबल ऐसा लें, जो सोफा व तमाम फर्नीचर के साथ मैच करे. लाइट फर्नीचर लेने से बचें. घर की दीवारों पर लाइट कलर ही करवायें. इससे घर का कलर कॉन्ट्रास्ट बना रहेगा. सीलिंग व लाइटिंग पर भी ध्यान देना चाहिए. कोशिश यही करनी चाहिए कि ह्वाइट व येलो रोशनी देने वाली ही लाइट का इस्तेमाल किया जाये. इससे घर की खूबसूरती निखर कर आती है. फॉल सीलिंग को अपनाकर सीलिंग को भी खूबसूरत बनाया जा सकता है. वर्क नेचर व लाइफ स्टाइल के हिसाब से डिजाइन करें मास्टर बेडरूम मास्टर बेडरूम सुकून व आराम का एहसास दिलाने वाला स्थान होता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि मास्टर बेडरूम को अपने वर्क नेचर, लाइफ स्टाइल के अनुसार ही बनाना चाहिए. कई लोग रात के समय में भी ऑफिस का काम करते हैं, ऐसे में वो इस जगह पर एक्जीक्यूटिव कॉर्नर बना सकते हैं. जरूरत पड़ने पर रात में भी वे कंप्यूटर पर बैठ काम कर सकते हैं. मास्टर बेडरूम का कलर लाइट रखा जाये, ताकि कलर इफेक्ट कूलनेस का एहसास कराये. ह्वाइट बेस, लाइट ग्रीन जैसे कलर बेस्ट हो सकते हैं. बेड के अपोजिट एलइडी लगा सकते हैं, ताकि आराम करते वक्त आप टीवी देख सकें. एक्सपर्ट बताते हैं कि बेड साइड दीवार पर पोट्रेट लगाने की बजाये उसी साइज की फैमिली तस्वीर लगायें, तो घर और भी ज्यादा खूबसूरत हो जाता है. इस रूम के साथ वॉशरूम अटैच होता है, ऐसे में कोशिश यही करनी चाहिए कि वाॅशरूम का गेट छुपा रहे. इसके लिए स्लाइडिंग टेक्निक का इस्तेमाल कर सकते हैं. ड्रेसिंग टेबल व वॉडरोब लाइट कलर में ही लगाया जाये, तो बेडरूम काफी खूबसूरत लगेगा. घर में फास्ट कलर कॉम्बिनेशन में पर्दे लगाने चाहिए, ताकि आंखों में न गड़े व दीवारों आदि के साथ कॉन्ट्रास्ट खिलकर आये. बच्चों के बेडरूम में दें उनकी पसंद को तरजीह एक्सपर्ट बताते हैं कि बच्चों के बेडरूम को डिजाइन करते वक्त कई बातों का ख्याल रखा जाता है. लड़का या लड़की के केस में अलग-अलग प्रकार से उनके रूम के इंटीरियर में बदलाव किया जाता है. लड़कियां अक्सर पिंक व पर्पल कलर पसंद करती हैं. ऐसे में उनके वॉल पर इन रंगों की मदद से पेंट किया जाता है. वहीं बच्चों को रिझाने के लिए व वॉल को और भी ज्यादा अट्रैक्टिव लुक देने के लिए म्यूरल आर्ट का सहारा लिया जा सकता है. 15 साल से कम उम्र के बच्चों के इंटीरियर को खास बनाने के लिए बच्चे के हॉबी के अनुसार वॉल पेंट करना चाहिए. यदि बच्चा एकेडमिक्स में अच्छा है व स्पोर्ट्स में कमजोर है, तो ऐसे में वॉल पर स्पोर्टी टेक्सचर पेंट कर बच्चे का इस ओर भी इंट्रेस्ट जगाया जा सकता है. बच्चों के रूम के तमाम फर्नीचर को कभी स्कवायरिश नहीं बनाना चाहिए. ऐसा इसलिए है कि खेल-कूद के दौरान उनको चोट आ सकती है. सबसे जरूरी व खास बात यह है बच्चों के रूम में स्टडी टेबल का होना. इसका प्लेसमेंट विंडो के बगल में करना चाहिए, ताकि दिन में भी बराबर रोशनी मिलती रहे. सेमी मॉड्यूलर कॉन्सेप्ट पर किचन को करें डिजाइन फ्लैट्स में अमूमन 60 स्कवायर फीट किचन स्पेस होता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि किचन को सेमी मॉड्यूलर कॉन्सेप्ट की तर्ज पर सजाना चाहिए. लेकिन जरूरी सामान, जैसे चिमनी इत्यादि से समझौता नहीं करना चाहिए. इस सिस्टम से किचन को तैयार करने से काफी स्पेस हमारे काम आ सकता है. वहीं कबर्ड के अंदर के साथ-साथ कई सामान का प्लेसमेंट आसानी से हो जाता है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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