लगातार एक ही पॉश्चर में बैठने से होती है साइटिकाडॉ रतन कुमार, फीजियोथेरेपिस्ट साइटिका होने के कई कारण हैं, लेकिन पहला व मुख्य कारण है- शारीरिक मुद्रा यानी पॉश्चर. यह बीमारी उन लोगों को ज्यादा होती है, जो 8-10 घंटे कंप्यूटर के सामने लगातार बैठकर काम करते हैं. इस दौरान वह एक ही प्रकार के पॉश्चर में रह जाते है. ऐसे में मसल्स कमजोर हो जाते हैं और पूरा लोड स्पाइन पर आ जाता है. स्पाइन के बीच में गैप रहता है, जिसके बीच से नर्व गुजरते हैं. इसके दबने के कारण गैप कम होता है. नर्व के दबने से यह बीमारी होती है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा है. महिलाएं घरेलू काम जैसे खाना बनाना इत्यादि झुककर करती है. बीमारी होने से लोगों के कमर में दर्द, कूल्हों में दर्द, जांघ में दर्द और पैर में असहनीय दर्द होता है. झिनझिनी भी होती है. शरीर में ऐसे लक्षण दिखायी देने पर फौरन डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए. शुरुआती दौर में इस बीमारी का इलाज संभव है. बीमारी से बचाव के लिए जरूरी है कि जो व्यक्ति घंटों कंप्यूटर पर काम करते हैं, उन्हें हर घंटे पॉश्चर में बदलाव करना चाहिए. इसका ट्रीटमेंट फीजियोथेरेपी से किया जाता है. बीमारी : साइटिकालक्षण : कमर, कूल्हों, जांघ और पैर में दर्द, झिनझिनी और कनकनी भी होती है.बचाव : जो व्यक्ति घंटों कंप्यूटर पर बैठकर काम करते हैं, वह हर घंटे पॉश्चर में बदलाव करें.
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लगातार एक ही पॉश्चर में बैठने से होती है साइटिका
लगातार एक ही पॉश्चर में बैठने से होती है साइटिकाडॉ रतन कुमार, फीजियोथेरेपिस्ट साइटिका होने के कई कारण हैं, लेकिन पहला व मुख्य कारण है- शारीरिक मुद्रा यानी पॉश्चर. यह बीमारी उन लोगों को ज्यादा होती है, जो 8-10 घंटे कंप्यूटर के सामने लगातार बैठकर काम करते हैं. इस दौरान वह एक ही प्रकार के […]
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Prabhat Khabar Digital Desk
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