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परीक्षा में बहुत काम आयेगी क्लास की पढ़ायी

परीक्षा में बहुत काम आयेगी क्लास की पढ़ायी रितिका अग्रवाल मार्क्स : 97.75 प्रतिशत रैंक : स्कूल टॉपर संकाय : कॉमर्स स्कूल : नरभेराम हंसराज इंगलिश स्कूल, बिष्टुपुर बोर्ड : आइएससी माता-पिता : सरिता देवी अग्रवाल, किशनलाल अग्रवाल लाइफ रिपोर्टर @ जमशेदपुर मैंने शुरू से ही तय कर लिया था कि मुझे स्कूल में अच्छी […]

परीक्षा में बहुत काम आयेगी क्लास की पढ़ायी रितिका अग्रवाल मार्क्स : 97.75 प्रतिशत रैंक : स्कूल टॉपर संकाय : कॉमर्स स्कूल : नरभेराम हंसराज इंगलिश स्कूल, बिष्टुपुर बोर्ड : आइएससी माता-पिता : सरिता देवी अग्रवाल, किशनलाल अग्रवाल लाइफ रिपोर्टर @ जमशेदपुर मैंने शुरू से ही तय कर लिया था कि मुझे स्कूल में अच्छी पोजीशन पर रहना है. मैंने लक्ष्य के मुताबिक ही तैयारी की. मैंने कभी भी क्लास मिस नहीं किया. टीचर की बतायी बातों पर हमेशा गौर किया.क्लास की पढ़ायी पर किया फोकस मैंने क्लास की पढ़ायी पर फोकस किया था. स्कूल में टीचर पढ़ाने के बाद चैप्टर से संबंधित हर तरह के प्रश्न बताती थीं. उत्तर लिखने का सही तरीका भी बताती थीं. इस तरह देखें तो आधी तैयारी क्लास में ही हो जाती थी. घर पर दोहराना भर रह जाता था. रोज करती थी रीविजन प्री बोर्ड से पहले मैं घर पर दो से तीन घंटे डेली पढ़ती थी. इस दौरान स्कूल में पढ़ाये पाठ को दोहराना और डाउट को नोट करना होता था. मैं हर तरह के डाउट को खुद हल करने की कोशिश करती थी. ज्यादा परेशानी होने पर अगले दिन टीचर से पूछ लेती थी. यह मेरा डेली का रूटीन बन गया था. प्री बोर्ड तक मेरा यही रूटीन चला. प्री बोर्ड के बाद छह-सात घंटे सेल्फ स्टडी प्री बोर्ड के बाद मैं छह से सात घंटे तक घर में पढ़ने लगी. हर विषय पर ध्यान जाये, इसके लिए मैंने रूटीन बना लिया था. मेरा मानना है कि दस घंटे पढ़ने से अच्छा है कि आप थोड़ी देर कम पढ़ें, लेकिन एकाग्रचित्त होकर पढ़ें. किताब खोलकर बैठ जाने भर से पढ़ायी नहीं हो जाती. मैथ्स व अकाउंट्स पर दिया अधिक ध्यान मैंने मैथ्स और अकाउंट्स पर अधिक ध्यान दिया था. इसमें मुझे थोड़ी दिक्कत होती थी. मैथ्स की बात करूं तो इसमें इंटीग्रेशन को बार-बार बनाना पड़ा. इंटीग्रेशन में बड़े सम को फॉर्मूला व इक्वेशन के माध्यम से छोटा कर हल निकालना होता है. यह डेली प्रैक्टिस की मांग करता है. ऐसे सवालों को आप एक-दो दिन नहीं बनाते हैं, तो अगले दिन दिक्कत हो सकती है. इसी तरह अकाउंट्स भी प्रैक्टिकल सब्जेक्ट है. मैंने सबसे ज्यादा मेहनत इन्हीं दो विषयों में की थी.दीदी से मिली मदद मैथ्स में किसी तरह की दिक्कत होने पर दीदी खुशबू अग्रवाल से मदद लेती थी. वह इंजीनियर हैं. उन्होंने मुझे काफी प्रोत्साहित किया. वह हर तरह के सवाल को काफी विस्तार से समझाती थीं. साथ ही टीचर से भी काफी सपोर्ट मिला. आइएएस बनना है सपना वर्तमान में मैं कोलकाता के गोयनका कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से बीकॉम कर रही हूं. मैं एक्चुअरी करना चाहती हूं. मैंने इसकी तैयारी शुरू कर दी है. इसके बाद मैं सिविल सर्विस की तैयारी करूंगी. मेरा लक्ष्य आइएएस अफसर बनना है. बात पते की जितनी देर पढ़ें, पूरी तरह कंसंट्रेट होकर पढ़ें तैयारी के दौरान मोबाइल आदि से दूर रहें, इसमें काफी समय जाया होता हैरेगुलर रहें और रीविजन जरूर करें

Prabhat Khabar Digital Desk
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