जमशेदपुर: मुंबई हज कमेटी ने जइफ (बुजुर्ग) को मक्का-मदीना की यात्र की अनुमति दे दी है. अगर 19 जनवरी 1945 या फिर उससे पहले पैदा हुए लोग हज यात्र पर जाना चाहते हैं, तो उनके साथ एक अटेंडर होना अनिवार्य है. किसी कारणवश यदि अटेंडर की यात्र में दिक्कत आती है, तो ऐसे जइफ यात्रियों को दूसरे ग्रुप के साथ जोड़ दिया जायेगा.
उस ग्रुप में उनके जान पहचान के लोग होने अनिवार्य हैं, जो उनकी देखभाल कर सके. इसे रिजर्व कैटेगरी का नाम दिया गया है. जमशेदपुर खिदमत हज कमेटी के अध्यक्ष समीर परवेज ने बताया कि पिछले वर्ष जइफ को रोक दिया गया था. इसके बाद उन्हें मुंबई के ग्रुप के साथ भेजा गया था. ऐसी स्थिति में काफी जइफ यात्री अपने ग्रुप से अलग हो गये थे. इस मामले को झारखंड हज कमेटी समेत अन्य कई राज्यों की कमेटियों ने उठाया था.
पहली किस्त 81 हजार की
झारखंड के हज यात्रियों को पहली किस्त के रूप में 81 हजार रुपये जमा कराने होंगे. किस्त जमा करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है. पहली किस्त कौन यात्री जमा करायेंगे, इसका पता लॉटरी के बाद चल पायेगा. यात्रियों की संख्या यदि झारखंड के कोटे से अधिक होती है तो फिर लॉटरी होगी. 20 फरवरी तक फार्म जमा कराये जाने की अंतिम तिथि है.
31 जुलाई तक एनआरआइ यात्री के पासपोर्ट जमा होंगे
स्थानीय हज यात्री पैसा जमा कराये जाने के साथ-साथ अपना पासपोर्ट जमा करा देंगे, लेकिन जो विदेश में नौकरी करते हैं और अपने परिवार या जमशेदपुर के ग्रुप के साथ हज यात्र करना चाहते हैं, उन्हें 31 जुलाई तक अपना पासपोर्ट हज कमेटी के पास जमा करा देना होगा. इसके बाद ही उन्हें यात्र संबंधी परमिट मिलेगा.
इस बार मिलेंगे 1500 रियाल
आजमीन ए हज को इस बार रांची हवाई अड्डा पर सिर्फ 1500 रियाल ही प्रदान किये जायेंगे. पहले उन्हें 2100 रियाल दिये जाते थे. रियाल का खर्च वे सऊदी में करते हैं. छह सौ रियाल की कमी के बारे में समीर परवेज ने बताया कि इस बार मक्का-मनोव्वरा में आठ दिन रहने तीनों वक्त के खाने और कुरबानी के पैसे सऊदी सरकार ने पहले ही काट लिये हैं, इसका भुगतान यात्रियों को नहीं करना होगा. इसलिए उन्हें छह सौ रियाल कम दिये जा रहे हैं. 2014 में ग्रीन कैटेगिरी के लिए 192000 रुपये और अजीजिया के लिए 164000 रुपये बतौर शुल्क लिया गया था, इस बार अभी तय नहीं किया गया है.

