नोट – फोटो हेल्थ बुलेटिन के फोल्डर में डाली जा चुकी हैडॉ. ए पी राव, जनरल फिजिशियन टेंशन व नशा ना बन जाए पैरालाइसिस का कारण पहले पैरालाइसिस 50 साल के ऊपर की उम्र के लोगों को होती थी लेकिन अब यह बीमारी 40 से अधिक उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रही है. बीपी होने के कारण ब्रेन की नस फट जाने से, ब्रेन की नस सूख जाने के चलते, ब्लड क्लोट होने कारण नस पर पड़ने वाले इफेक्ट से, इंफेक्शन के चलते नस सूख जाने की वजह से, किसी प्रकार का नशा का इस्तेमाल या टेंशन के कारण यह बीमारी हो सकती है. इसके चलते ब्रेन में इफेक्ट पड़ने से शरीर का आधा हिस्सा काम करना बंद कर देता है. यदि ब्रेन के दायें भाग के नस में इफेक्ट पड़ा हो तो शरीर के दायें हिस्से पर प्रभाव पड़ता है. ब्रेन के बायें हिस्से के नस में इफेक्ट पड़ने से शरीर के बायें हिस्से में इफेक्ट पड़ता है. वहां पैरालाइसिस होने का खतरा रहता है. इससे बचाव के लिये बीपी व डायबटिज कंट्रोल में रखना चाहिए, तेल-मसाले कम खाना चाहिए, चिंता से दूर रहना चाहिए, जंक फूड नहीं खाना चाहिए व रोजाना एक्सरसाइज करना चाहिए. बीमारी- पैरालाइसिसलक्षण- ब्रेन में इफेक्ट पड़ने से शरीर का आधा हिस्सा काम करना बंद कर देता है. उपाय- बीपी व डायबटिज कंट्रोल में रखें, तेल-मसाले कम खायें, एक्सरसाइज करें, डॉक्टर से सलाह लें.
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हेल्थ बुलेटिन – डॉ. ए पी राव
नोट – फोटो हेल्थ बुलेटिन के फोल्डर में डाली जा चुकी हैडॉ. ए पी राव, जनरल फिजिशियन टेंशन व नशा ना बन जाए पैरालाइसिस का कारण पहले पैरालाइसिस 50 साल के ऊपर की उम्र के लोगों को होती थी लेकिन अब यह बीमारी 40 से अधिक उम्र के लोगों में भी देखने को मिल रही […]
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Prabhat Khabar Digital Desk
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