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डीसी-एसपी की देखरेख में होगा यूनियन चुनाव

जमशेदपुर : झारखंड हाइकोर्ट में न्यायधीश चंद्रशेखर की अदालत (कोर्ट नंबर 14) ने फैसला सुनाया है कि टाटा वर्कर्स यूनियन का चुनाव डीसी एसपी की देखरेख में होगा. दो माह में चुनाव संपन्न करा लेना है. कोर्ट ने सत्ता पक्ष (पीएन सिंह व उनकी टीम) की ओर से अधिवक्ता द्वारा चुनाव कराने के लिए श्रमायुक्त […]

जमशेदपुर : झारखंड हाइकोर्ट में न्यायधीश चंद्रशेखर की अदालत (कोर्ट नंबर 14) ने फैसला सुनाया है कि टाटा वर्कर्स यूनियन का चुनाव डीसी एसपी की देखरेख में होगा. दो माह में चुनाव संपन्न करा लेना है.
कोर्ट ने सत्ता पक्ष (पीएन सिंह व उनकी टीम) की ओर से अधिवक्ता द्वारा चुनाव कराने के लिए श्रमायुक्त सह ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार को अधिकृत करने की मांग को भी अस्वीकार कर दिया. हाइकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि अगर किसी तरह का विवाद होता है तो डीसी व एसपी उसको दूर करते हुए चुनाव संपादित करायेंगे. हाइकोर्ट ने डीसी को पूरे चुनाव कराने का अधिकार दिया है.
सोमवार को न्यायाधीश चंद्रशेखर की अदालत में सुनवाई शुरू हुई. शिकायतकर्ता धर्मेद्र उपाध्याय की ओर से अधिवक्ता ने डीसी और एसपी की देखरेख में चुनाव कराने की मांग की. महामंत्री बीके डिंडा के अधिवक्ता ने भी अपनी बातें रखी और डीसी व एसपी की देखरेख में ही चुनाव कराये जाने की मांग की. इस दौरान कमेटी मेंबर आरके सिंह, सरोज सिंह समेत जितने भी इंटरवेनर हैं, उनके वकीलों ने भी अपनी बातें रखीं.
करीब एक घंटे तक सबकी बातों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने आदेश सुनाया. न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि सभी पक्ष स्वच्छ और पारदर्शी चुनाव चाहता है तथा डीसी व एसपी की देखरेख में चुनाव कराने की मांग की गयी है. लिहाजा, कोर्ट का मानना है कि डीसी व एसपी की देखरेख में 60 दिनों के भीतर चुनाव कराया जाये. हालांकि, धर्मेद्र उपाध्याय और विपक्ष के वकीलों ने एक माह में ही चुनाव संपादित कराने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने माना कि 15 दिन नोटिस और अन्य प्रक्रिया में गुजर जायेगी. अत: एक माह का समय काफी कम होगा.
बाद में महामंत्री बीके डिंडा के वकील ने 45 दिनों का समय मांगा, लेकिन दोनों ही मांग को खारिज करते हुए डीसी व एसपी की देखरेख में दो माह में चुनाव कराने का आदेश दिया. इस दौरान महामंत्री बीके डिंडा और धर्मेद्र उपाध्याय के वकीलों ने मांग की कि डीसी व एसपी की सिर्फ देखरेख होने से चुनाव कराने में परेशानी होगी क्योंकि अध्यक्ष सेवानिवृत्त होने के बाद भी चुनाव कराने पर आमादा हैं जबकि महामंत्री बीके डिंडा भी अपने स्तर से चुनाव करा रहे हैं, जिससे विवाद बरकरार रह सकता है और गलत प्रक्रिया भी अपनायी जा सकती है. इस पर न्यायाधीश ने कहा कि अगर किसी तरह का विवाद होता है या किसी तरह की अनियमितता होती है तो तत्काल डीसी व एसपी हस्तक्षेप करेंगे और पूरी प्रक्रिया को संपादित करायेंगे. इसके बाद कोर्ट ने इस केस की सुनवाई बंद कर दी.
Prabhat Khabar Digital Desk
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