जमशेदपुर : अधूरे दस्तावेज पर शिवा को टेंडर, एसियाड ने उठाये सवाल

Updated at : 02 Feb 2019 7:47 AM (IST)
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जमशेदपुर :  अधूरे दस्तावेज पर शिवा को टेंडर, एसियाड ने उठाये सवाल

जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में नर्सिंग व मानव संसाधन (आउटसोर्स) के लिए निकाले गये टेंडर में दो बार एल वन रही एजेंसी एसियाड डिटेक्टिव ब्यूरो को तीसरे टेंडर में आचरण प्रमाणपत्र को आधार बनाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. एसियाड ने डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस द्वारा जारी प्रमाणपत्र सौंपा है जबकि प्रबंधन ने […]

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जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में नर्सिंग व मानव संसाधन (आउटसोर्स) के लिए निकाले गये टेंडर में दो बार एल वन रही एजेंसी एसियाड डिटेक्टिव ब्यूरो को तीसरे टेंडर में आचरण प्रमाणपत्र को आधार बनाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. एसियाड ने डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस द्वारा जारी प्रमाणपत्र सौंपा है जबकि प्रबंधन ने डीसी या डीएम का प्रमाणपत्र नहीं होने की बात कहकर एजेंसी को टेंडर से बाहर कर कार्य शिवा प्रोटेक्शन को सौंप दिया है.

एमजीएम प्रबंधक द्वारा तकनीकी बिड से हटाने के लिए दिये गये आधार को एसियाड ने खारिज करते हुए स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि अधूरे दस्तावेज को नजरअंदाज कर टेंडर कमेटी ने शिवा को काम दिया है, जो गलत है. एसियाड ने सचिव को बताया है कि जिस शिवा प्रोटेक्शन को फाइनल टेंडर दिया गया है उसके द्वारा शपथ पत्र तक नहीं दिया गया. उसका जीएसटी जुलाई 2018 तक ही अपडेट है. यह एक पार्टनरशिप फार्म है जिसमें दो पार्टनर है.
उसके दस्तावेज भी नहीं दिये गये है, जबकि फैक्ट्री एक्ट 1956 के तहत पार्टनर का दस्तावेज होना जरूरी है. शिवा ने मानव संसाधन के लिए पेपर जमा कराया था लेकिन उसने नर्सिंग के लिए मापदंड को पूरा नहीं किया है.
जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में नर्सिंग व मानव संसाधन (आउटसोर्स) के लिए निकाले गये टेंडर में दो बार एल वन रही एजेंसी एसियाड डिटेक्टिव ब्यूरो को तीसरे टेंडर में आचरण प्रमाणपत्र को आधार बनाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है.
एसियाड ने डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस द्वारा जारी प्रमाणपत्र सौंपा है जबकि प्रबंधन ने डीसी या डीएम का प्रमाणपत्र नहीं होने की बात कहकर एजेंसी को टेंडर से बाहर कर कार्य शिवा प्रोटेक्शन को सौंप दिया है.
एमजीएम प्रबंधक द्वारा तकनीकी बिड से हटाने के लिए दिये गये आधार को एसियाड ने खारिज करते हुए स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि अधूरे दस्तावेज को नजरअंदाज कर टेंडर कमेटी ने शिवा को काम दिया है, जो गलत है. एसियाड ने सचिव को बताया है कि जिस शिवा प्रोटेक्शन को फाइनल टेंडर दिया गया है उसके द्वारा शपथ पत्र तक नहीं दिया गया. उसका जीएसटी जुलाई 2018 तक ही अपडेट है. यह एक पार्टनरशिप फार्म है जिसमें दो पार्टनर है.
उसके दस्तावेज भी नहीं दिये गये है, जबकि फैक्ट्री एक्ट 1956 के तहत पार्टनर का दस्तावेज होना जरूरी है. शिवा ने मानव संसाधन के लिए पेपर जमा कराया था लेकिन उसने नर्सिंग के लिए मापदंड को पूरा नहीं किया है.
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