हार्ट अटैक से मरने वालों में 76 फीसदी संख्या युवाओं की

जमशेदपुर: शहर की बदलती आबोहवा, अस्त-व्यस्त दिनचर्या और बदलते लाइफस्टाइल की वजह से युवाओं में कई तरह की बीमारियां घर कर रही हैं. इसकी वजह से वे असमय मौत के शिकार हो रहे हैं. बिष्टुपुर स्थित पार्वती घाट और सुवर्णरेखा बर्निग घाट से मिले आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं. इस साल के […]
जमशेदपुर: शहर की बदलती आबोहवा, अस्त-व्यस्त दिनचर्या और बदलते लाइफस्टाइल की वजह से युवाओं में कई तरह की बीमारियां घर कर रही हैं. इसकी वजह से वे असमय मौत के शिकार हो रहे हैं. बिष्टुपुर स्थित पार्वती घाट और सुवर्णरेखा बर्निग घाट से मिले आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं.
इस साल के एक से 14 जून के आंकड़ों पर गौर करें तो इन दोनों बर्निग घाट पर कुल 151 लाशें आयीं, जिनमें अधिकांश की मौत दिल की गति रुकने या हार्ट अटैक होने की वजह से बतायी गयी. आंकड़े के मुताबिक कुल 120 लोगों की हार्ट अटैक से मौत हुई है जिसमें 92 युवा शामिल हैं, जिनकी उम्र 18 से 42 साल के बीच की है. यानी हार्ट अटैक 76} युवाओं की मौत हुई है. इन मौत के कारणों के बारे में सीए फेल्योर (कार्डियेक अरेस्ट एंड फेल्योर) बताया गया है. इसकी मुख्य वजह युवाओं के शरीर में प्रतिरक्षण क्षमता की आयी कमी, बढ़ता प्रदूषण और बदलता लाइफस्टाइल माना जा रहा है.
अगर आंकड़ों पर गौर करें तो सिर्फ बिष्टुपुर स्थित पार्वती घाट में एक से लेकर 14 जून तक 45 लाशें आयीं जिनमें 24 युवाओं की थी. इसी तरह साकची सुवर्णरेखा बर्निग घाट में एक से 14 जून के बीच 116 लाशें आयीं, जिसमें से 58 युवा थे, जिनकी उम्र 18 से 42 साल के बीच की थी. इस तरह की मौत होना युवाओं के लिए खतरे की घंटी है.
एकांकी हो रहे बूढ़े बोझ बन रही जिंदगी
आज हालात यह है कि हर फैमिली में माता-पिता के अलावा एक या दो बच्चे ही होते है. ऐसे में एक बच्चे की मौत होने के बाद बूढ़े मां-बाप अकेले हो जाते हैं. उनके पास कोई रास्ता नहीं बचता है और जिंदगी बोझ बन जाती है. किसी भी पिता के लिए सबसे बड़ा बोझ तब होता है, जब उसके बेटे की अर्थी को कंधा देना होता है. ऐसी परिस्थितियां कई परिवारों में उत्पन्न हो रही है.
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