नये साल से कैंसर के इलाज का हब बन जायेगा टीएमएच-एमटीएमएच

Published at :20 Sep 2018 7:35 AM (IST)
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नये साल से कैंसर के इलाज का हब बन जायेगा टीएमएच-एमटीएमएच

जमशेदपुर : नये साल से कैंसर के बेहतर इलाज के हब के रूप में एमटीएमच व टीएमएच विकसित हो जायेगा. इसके लिए काम शुरू हो चुका है और जनवरी से पूरी व्यवस्था को लागू कर दिया जायेगा. इसके लिए मुंबई स्थिति टाटा कैंसर अस्पताल में काम कर चुके और देश के करीब तीन कैंसर अस्पताल […]

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जमशेदपुर : नये साल से कैंसर के बेहतर इलाज के हब के रूप में एमटीएमच व टीएमएच विकसित हो जायेगा. इसके लिए काम शुरू हो चुका है और जनवरी से पूरी व्यवस्था को लागू कर दिया जायेगा. इसके लिए मुंबई स्थिति टाटा कैंसर अस्पताल में काम कर चुके और देश के करीब तीन कैंसर अस्पताल को स्थापित करने वाले डाॅ अनिल कुमार धर ने टीएमएच में योगदान दे दिया है.
वहीं अब एमटीएमएच और टीएमएच के बीच कोई दीवार नहीं रहेगा और दोनों एक साथ ही काम करेगा. इसके तहत बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हो रही है, बिहार और झारखंड का पहला यह ऐसा अस्पताल होगा, जहां इसकी शुरुआत हो रही है. इससे आसपास के लोगों को काफी फायदा होगा. बोन मैरो को लेने के लिए कोलकाता और दिल्ली की एजेंसी के साथ एमओयू हो रहा रहा है.
यह जानकारी बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में टीएमएच के जीएम डॉ राजन चौधरी ने दी. इस दौरान उनके साथ डॉ अनिल कुमार धर, डॉ सुजाता मित्रा, डॉ केपी दुबे समेत अन्य डॉक्टर उपस्थित थे. बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा के लिए टीएमएच की नयी बिल्डिंग यानी जेजीएमएच के ऑपरेशन थियेटर के नीचे बनाया जा रहा है.
नयी मशीन भी लग रही है, टाटा संस ने की है मदद
डॉ राजन चौधरी ने बताया कि टीएमएच व एमटीएम एक साथ काम कर रही है. टाटा संस ने नयी बिल्डिंग व सारे संसाधन उपलब्ध कराने के लिए राशि उपलब्ध करायी है. टीएमएच व एमटीएमएच (कैंसर अस्पताल) के बीच समन्वय स्थापित कर टाटा स्टील कैंसर के इलाज का हब बना रही है. इसकी आधारशिला तीन मार्च 2018 को ही टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रतन टाटा ने रखी थी, जिसके बाद से काम चल रहा है. यहां लिनियर एक्सलेटर लगाया जायेगा, जबकि पीइडी सीटी मशीन भी लगायी जायेगी.
जिससे कैंसर की पहचान हो सकेगा. इसके अलावा ब्रैकी थेरेपी यूनिट को नये सिरे से बनाया जा रहा है, जो पहले से एक है. इसके अलावा अभी अस्पताल में कुल 72 बेड है, जिसकी संख्या को बढ़ाकर 130 किया जायेगा. पैलिएटिव केयर यूनिट, डे केयर कीमोथेरेपी वार्ड, मेडिकल अंकॉलॉजी व रेडिएशन ऑनक्लोजी वार्ड की स्थापना की जायेगी. सारे वार्ड को एयरकंडिशन से युक्त कर दिया जायेगा. इसके अलावा नया ओपीडी कांप्लेक्स भी यहां खोला जायेगा. करीब दस माह में पूरा होने वाले इस विस्तार में सर्जिकल ऑनकॉलॉजी व मेडिकल ऑनकॉलॉजी सर्विसेज शुरू की जायेगी. यह टीएमएच में रहेगी जबकि एमटीएमएच में रेडिएशन ऑनकॉलॉजी रहेगा.
झारखंड में हर साल 34 हजार नये कैंसर के मरीज मिल रहे हैं, 2022 तक 40 हजार के पार जाने का अनुमान: संवाददाता सम्मेलन में बताया गया कि झारखंड में कैंसर के मरीजों की संख्या हर साल करीब 33 हजार से 34 हजार के करीब रहता है. साल 2015 में 32,035 नये केस आये थे, जबकि 2017 में नये केस की संख्या 34,183 हो गयी. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की ओर से जमशेदपुर, रांची व बोकारो से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह जानकारी दी गयी है. वहीं अनुमान है कि 2020 तक नये केस की संख्या 37,679 हो जायेगी, जबकि 2022 तक नये कैंसर मरीजों की संख्या 40,205 हो सकती है.
टीएमएच और एमटीएमएच की बिल्डिंग के बीच रास्ता होगा : नये बिल्डिंग को ऐसे तैयार किया जा रहा है कि जो पुराना एमटीएमएच अस्पताल है, उससे टीएमएच में बन रही नयी बिल्डिंग को जोड़ दिया जायेगा. बीच में एक सड़क है. सड़क के ऊपर से ही एक छोटा सा फ्लाइओवर के तरह का रास्ता होगा, जो बिल्डिंग को आपस में जोड़ेगा.
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