रेरा में फंसा 1500 कराेड़ का रियल इस्टेट काराेबार

Updated at : 09 Jul 2018 3:33 AM (IST)
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रेरा में फंसा 1500 कराेड़ का रियल इस्टेट काराेबार

जमशेदपुर : रियल इस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट (रेरा) लागू होने की वजह से जमशेदपुर में 1500 कराेड़ से अधिक का रियल इस्टेट का काराेबार प्रभावित हाे रहा है. पुराने प्राेजेक्ट पर रेरा के मानकाें का पालन करने संबंधी गाइडलाइन जारी कर दिये जाने के कारण रियल इस्टेट काराेबार से जुड़े उद्यमियाें ने 150 से […]

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जमशेदपुर : रियल इस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट (रेरा) लागू होने की वजह से जमशेदपुर में 1500 कराेड़ से अधिक का रियल इस्टेट का काराेबार प्रभावित हाे रहा है. पुराने प्राेजेक्ट पर रेरा के मानकाें का पालन करने संबंधी गाइडलाइन जारी कर दिये जाने के कारण रियल इस्टेट काराेबार से जुड़े उद्यमियाें ने 150 से अधिक प्राेजेक्ट पर ब्रेक लगा दी है. बिल्डराें द्वारा एग्रीमेंट के अाधार पर टिस्काे एरिया में जमीन की खरीद ताे कर ली है, लेकिन रजिस्ट्री बंद कर दिये जाने के कारण खरीदार रुचि नहीं दिखा रहे हैं.
रेरा के गाइडलाइन के मुताबिक अब तक जितने भी प्राेजेक्ट पूरे किये जा चुके हैं, उन सभी काे निबंधन कराया जाना जरूरी है. निर्माण की पूरी जानकारी रेरा के अंतर्गत देनी हाेगी. रियल इस्टेट से जुड़े प्रतिनिधियाें ने नगर विकास मंत्री सीपी सिंह, नगर सचिव से मिलकर पुराने प्राेजेक्ट काे रेरा से बाहर करने का आग्रह किया है. आश्वासन ताे उन्हें मिला, लेकिन काेई ठाेस कार्रवाई नहीं हाेता देख अब मुख्यमंत्री से मिलने का फैसला किया है. जमशेदपुर बिल्डर एसाेसिएशन के चेयरमैन काैशल सिंह ने बताया कि उद्यमी-व्यवसायी रेरा का विराेध नहीं कर रहे हैं. जो भी नये प्राेजेक्ट तैयार हाेंगे, उनका निबंधन रेरा के तहत ही कराया जायेगा, लेकिन पुराने प्राेजेक्ट के खाता-बही काे लंबे अरसे के बाद मेंटेन करना संभव नहीं है.
इसलिए सरकार से मांग की गयी थी कि जाे फ्लैट-मकान बिक चुके हैं या निर्माण संपन्न हाेने की स्थिति में आ चुके हैं, उन्हें रेरा से बाहर कर दिया जाये. एसाेसिएशन के पूर्व चेयरमैन शिबू बर्मन ने कहा कि रेरा का कंसेप्ट टाउनशिप प्राेजेक्ट के लिए है. जमशेदपुर जैसे शहर में इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए. यहां छाेटे-छाेटे प्राेजेक्ट पर लाेग काम करते हैं. बंगाल ने इसे लागू नहीं किया है, जबकि यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश सरकार ने पुराने प्राेजेक्ट काे रेरा से बाहर रखते हुए राहत प्रदान की है. सिर्फ झारखंड में इसे पेचीदा बनाया हुआ है. रेरा-लीज मामले के कारण रजिस्ट्री बंद है, जिसके कारण लाेगाें ने अब घर खरीदने में रुचि दिखानी कम कर दी है.
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