जमशेदपुर : 2017 से बरकरार है मेडिकल एक्सटेंशन का टेंशन
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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मैनेजमेंट से आग्रह कर तत्कालीन कमेटी ने औपबंधिक सुविधा करायी थी चालू , चुनाव समाप्त होते ही लागू कर दिया गया एक्सटेंशन जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों को मेडिकल एक्सटेंशन का टेंशन कोई नयी बात नहीं है. जनवरी 2017 से ही मेडिकल एक्सटेंशन को रोक दिया गया था. चुनाव नजदीक आ चुका था. लिहाजा, […]
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मैनेजमेंट से आग्रह कर तत्कालीन कमेटी ने औपबंधिक सुविधा करायी थी चालू , चुनाव समाप्त होते ही लागू कर दिया गया एक्सटेंशन
जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों को मेडिकल एक्सटेंशन का टेंशन कोई नयी बात नहीं है. जनवरी 2017 से ही मेडिकल एक्सटेंशन को रोक दिया गया था.
चुनाव नजदीक आ चुका था. लिहाजा, यूनियन के तत्कालीन कमेटी के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद, महामंत्री बीके डिंडा और डिप्टी प्रेसिडेंट संजीव चौधरी टुन्नु ने संयुक्त रूप से चुनाव का हवाला देकर हर महीने इसको बढ़वाया था. लेकिन चुनाव समाप्त होने के तत्काल बाद अचानक से इसको लागू कर दिया गया और जुलाई से कोई एक्सटेंशन नहीं देने का फरमान जारी कर दिया गया.
बताया जाता है कि यूनियन चुनाव के कारण इसको टाल दिया गया था. मैनेजमेंट से आग्रह कर औपबंधिक चालू कराया गया था, लेकिन इसको बंद होना था और गुरुवार को यह अधिकारिक तौर पर यूनियन को जानकारी भी दे दी गयी. एक कर्मचारी को औसतन 15 से 20 लाख का नुकसान. मेडिकल एक्सटेंशन से एक अनुमान के अनुसार एक कर्मचारी को औसतन 15 से 20 लाख तक का नुकसान होना है.
सालाना बोनस नहीं मिलेगा, एक साल का अंतिम समय में ज्यादा ग्रेड होने के बावजूद भारी नुकसान होगा, उनका वेतन नहीं मिलेगा. वेतन नहीं मिलेगा, तो ग्रेच्यूटी की राशि घट जायेगी. वहीं एनएस ग्रेड को भी मेडिकल एक्सटेंशन नहीं मिलता है. उनका वेतनमान पहले से ही तय है, जिसके तहत उनको मेडिकल एक्सटेंशन नहीं दिया जाना है. मैनेजमेंट ने यह कदम स्टील वेज के घाटा को कम करने के लिए उठाया है. साथ ही कंपनी प्रबंधन ने बड़े से बड़े अधिकारियों को भी किसी तरह का एक्सटेंशन देना बंद कर दिया है.
यूनियन कर्मचारियों की सुविधा को बढ़ाने के लिए होता है. इसको घटाने के लिए नहीं होता है. लेकिन इसको घटाया जा रहा है, तो इस मसले का हल निकाला जाना चाहिए.
पीएन सिंह, पूर्व अध्यक्ष, टाटा वर्कर्स यूनियन
मेडिकल एक्सटेंशन रुकने से कर्मचारियों को काफी नुकसान होगा. इस नुकसान को रोकने के लिए यूनियन को कदम उठाना चाहिए. इसको लेकर मैनेजमेंट को भरोसा में लेकर बातचीत कर सुविधा शुरू कराना चाहिए.
रघुनाथ पांडेय, पूर्व अध्यक्ष, टाटा वर्कर्स यूनियन
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