एड्स पीड़ितों का हाल जानने बस्ती पहुंची टीम

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बस्ती के 16 युवकों की हुई जांच, किसी में नहीं मिला एचआइवी पॉजीटिव जमशेदपुर : शहर की एक बस्ती में एड्स पीड़ितों की जानकारी होने के बाद बुधवार को सिविल सर्जन डॉ महेश्वर प्रसाद के निर्देश पर स्वास्थ्य टीम वहां पहुंची. टीम ने पीड़ितों की जानकारी लेने के साथ 20 से ज्यादा उम्र के 16 […]

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बस्ती के 16 युवकों की हुई जांच, किसी में नहीं मिला एचआइवी पॉजीटिव

जमशेदपुर : शहर की एक बस्ती में एड्स पीड़ितों की जानकारी होने के बाद बुधवार को सिविल सर्जन डॉ महेश्वर प्रसाद के निर्देश पर स्वास्थ्य टीम वहां पहुंची. टीम ने पीड़ितों की जानकारी लेने के साथ 20 से ज्यादा उम्र के 16 युवकों की जांच की. किसी में भी एचआइवी के लक्षण नहीं पाये गये. जांच में पता चला कि जितने भी एड्स प्रभावित हैं, वह 2002 से 2007 के बीच के हैं. टीम ने पीड़ितों की लिस्ट बनाकर उनकी स्थिति, वह दवा ले रहे या नहीं आदि की जानकारी ली. जांच में पुराने एड्स पीड़ित नौ मरीज मिले.
अधीक्षक ने एआरटी पदाधिकारियों संग की बैठक. अस्पताल के अधीक्षक डॉ बी भूषण ने बुधवार को एड्स को लेकर एआरटी सेंटर के पदाधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने सेंटर में आने वाले मरीजों की जानकारी ली. सेंटर में ओड़िशा, बंगाल, झारखंड सहित दूसरे स्थानों से भी लोग आते है. प्रतिदिन 35 से 40 लोगों का एचआइवी टेस्ट किया जाता है. सेंटर में 2100 मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया गया है. जिसमें 1600 से ज्यादा मरीज दवा खा रहे है. वहीं 48 मरीज ऐसे है, जिनको एड्स के साथ टीबी की बीमारी भी है.
कई टीआइ सेंटर बंद. जिले में 2015 में एड्स के मरीजों को जागरूक करने के लिए नौ टारगेट इंटरवेंशन सेंटर व नॉन टारगेट इंटरवेंशन सेंटर थे. इसमें छह सेंटर चल रहे हैं, बाकी बंद हो गये.
स्वास्थ्य सचिव ने मांगी रिपोर्ट, टीम गठित. एमजीएम अस्पताल में भर्ती एड्स मरीजों की स्थिति के अलावा एआरटी सेंटर में आने वाले मरीजों को मिलने वाली दवा व सुविधाओं पर स्वास्थ्य सचिव निधि खरे ने सिविल सर्जन डॉ महेश्वर प्रसाद व एमजीएम कॉलेज के प्राचार्य डॉ एसी अखौरी से रिपोर्ट मांगी है. प्राचार्य के निर्देश पर अस्पताल में अधीक्षक ने एक टीम का गठन किया है. सिविल सर्जन ने जिला सर्विलेंस विभाग से रिपोर्ट मांगी है, जिसे विभाग को भेजा जायेगा.
बस्ती में एड्स मरीजों से कोई भेदभाव नहीं
एमजीएम में भर्ती एड्स मरीज जमशेदपुर डिस्ट्रिक लेवर फॉर एचआइवी एंड एड्स संस्था का प्रोजेक्ट मैनेजर था. उसने बताया कि बस्ती में जिन मरीजों की मौत हुई है या जो पीड़ित हैं, वे 10 साल पुराने हैं. हाल में एड्स का कोई मरीज नहीं मिला है. वह बस्ती में पीड़ितों के बीच जागरूकता फैलाने का काम करता था. जांच के बाद उन्हें दवा कैसे मिले इसकी व्यवस्था करता है. बस्ती में एड्स का मरीज होने पर भी किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं है. सभी मिलकर रहते है. किसी को कोई परेशानी नहीं है.
एमजीएम में गठित कमेटी
अध्यक्ष : प्राचार्य, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, सचिव : अधीक्षक, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, सदस्य : एचओडी, (माइक्रोबॉयोलॉजी), एचओडी (पीएसएम), काउंसलर (एचआइवी), एनजीओ कोलकाता सेमाटांस व एनजीओ सीएमसी बिहान.
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