जमशेदपुर : वित्तीय वर्ष 31 मार्च काे समाप्त हाेगा, लेकिन अंतिम तीन दिन लगातार बैंक-सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे, इसलिए समय रहते छह दिनाें में जरूरी काम यदि नहीं निपटाये गये, ताे व्यापारी आैर नाैकरी पेशा वर्ग दाेनाें काे ही संबंधित आयकर व वाणिज्य विभाग से नाेटिस मिल सकता है. इसके साथ ही साथ जेब पर असर डाल सकते हैं.
टैक्स देनदारी कम करने के लिए टैक्स सेविंग स्कीम्स में 31 मार्च से पहले निवेश कर लें. 50 हजार या उससे ज्यादा मासिक किराया देनेवाले कुल जाेड़ का पांच प्रतिशत टीडीएस काट कर सरकार के पास जमा करा दें. इसी वित्तीय वर्ष में यदि नौकरी बदली है, तो नयी कंपनी में फॉर्म 12बी के माध्यम से टीडीएस की जानकारी दें, नहीं तो अधिक टीडीएस कटाैती हाे जायेगी. 2016-17 का आयकर रिटर्न 31 मार्च से पहले हर हाल में भर दें. 2016 की आइटीआर भरने में काेई गलती हुई है,
ताे उसे सुधारने का माैका इस वर्ष के रिटर्न में उपलब्ध है. गलत ढंग से क्लेम हासिल करने वालाें पर 200 प्रतिशत जुर्माना लगाने का भी कानून है. सिंहभूम चेंबर अॉफ कॉमर्स के सचिव (टैक्स एंड फाइनांस) अधिवक्ता राजीव अग्रवाल ने टैक्स से जुड़ी कई जानकारियां विस्तार से प्रदान की.
रिवर्सल अॉफ आइटीसी. जारी किये गये टैक्स इनवॉयस पर यदि रिसीवर हमें 180 के दिनाें में उसका भुगतान नहीं करता है, ताे उस पर जाे आइटीसी हाेगा, वह रिवर्स हाे जायेगा. जब भुगतान पूरा हाेगा, तब रिसीवर उस पर आइटीसी हासिल कर सकता है. एक अक्तूबर 2017 से पहले यदि टैक्स इनवॉयस जारी किये गये हैं, ताे उनका भुगतान 31 मार्च 2018 तक मिल जाना चाहिए.
इ-वे बिल. एक अप्रैल 2018 से इ-वे बिल इंटर स्टेट जारी हाे रहा है. एक जून को देश भर में यह लागू हाेगा. एक अप्रैल काे यदि माल निकला है, ताे उसका इ-वे बिल 31 मार्च काे ही जारी किया जाना जरूरी है. बिल जेनरेट कर देने से किसी भी तरह की परेशानी नहीं हाेगी.
रिकंसिलेशन. कैश लेजर, क्रेडिट लेजर, लाइबिलिटी लेजर काे बुक अॉफ अकाउंट से 31 मार्च तक मैच कराना जरूरी है. क्रेडिट-डेबिट नाेट या फिर रेट डिफरेंस के लिए यदि नाेट जारी किये गये हैं, ताे उनका भी बुक अॉफ अकाउंट से मिलाना अवश्य करा लें, इसके बाद रिटर्न दाखिल करें.
एचएसएन काेड इन द इनवॉयस. कंपाेजिशन स्कीम के तहत 1.5 कराेड़ तक का काराेबार करनेवालाें काे एचएसएन काेड से छूट है. पांच कराेड़ वालाें काे दाे डिजीट एचएसएन काेड देना हाेगा. वित्तीय वर्ष 2017-18 में 31 मार्च तक यदि टर्न आेवर डेढ़ कराेड़ से अधिक हाे गया है, ताे एचएसएन काेड का उपयाेग अवश्य करें. पांच कराेड़ से अधिक का काराेबार करने वालाें काे चार डिजीट का काेड देना अनिवार्य है.
न्यू सीरिज अॉफ टैक्स इनवॉयस. टैक्स इनवॉयस की यदि सीरीज मेंटनेट करना चाहते हैं, ताे काेई दिक्कत नहीं है, यदि सीरीज चेंच करना चाहते हैं, ताे इसे अभी से कर लें, ताकि 31 के बाद दिक्कत नहीं हाे.
कंपाेजिशन स्कीम. कंपाेजिशन स्कीम का यदि लाभ लेना है, ताे फॉर्म जीएसटी सीएमपी- 02 काे 31 मार्च से पहले भर कर जमा करा दें. कंपाेजिशन स्कीम कैंसल करानी है, उन्हें जीएसटी सीएम -4 फॉर्म 7 अप्रैल 2018 के पहले फाइल करना हाेगा. उन्हें अपना क्लाेजिंग स्टॉक काे रिकार्ड एक मापदंड में तय कर आइटीसी क्लेम करना हाेगा.
ड्यू डेट अॉफ द रिटर्न. जीएसटीआर-3 बी जाे मार्च का है, वह 30 अप्रैल काे फाइल हाेगा. जीएसटीआर-1 फरवरी का है, उसे 10 अप्रैल काे फाइल करना हाेगा. जीएसटीआर-4 काे 18 अप्रैल आैर जीएसटीआर-6 के लिए 13 अप्रैल की तिथि निर्धारित है.
मासिक-तिमाही रिटर्न. वैसे डीलर, जिनका काराेबार डेढ़ कराेड़ से अधिक का है, उन्हें अब हर माह रिटर्न फाइल करना हाेगा. जिनका काराेबार डेढ़ कराेड़ से नीचे है, उन्हें तिमाही का अॉप्शन का पूर्व से ही प्राप्त है.
फॉर्म जीएसटी ट्रान-2. इस फॉर्म काे वैसे व्यवसायियाें के लिए भरना अनिवार्य है, जाे बिना डिटेल अॉफ आउट वर्ड् सप्लाइ-दस्तावेज जमा कराये एक्साइज ड्यूटी पर ट्रॉन-1 भर कर क्रेडिट ले चुके हैं. अब उन्हें 31 मार्च तक ट्रॉन-2 भरना हाेगा, जिसके बाद वे 40-60 प्रतिशत के आइटीसी के हकदार बन सकते हैं.
जीएसटीआर-6. इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर काे अपना रिटर्न 31 तक फाइल करना हाेगा, जिसकी अवधि जुलाई 2017 से फरवरी 2018 के बीच की है.
आइटीसी कैरी फारवर्ड. एक्सेस इनपुट टैक्स क्रेडिट काे कैरी फरवर्ड करना हाेगा. एक्सेस पेमेंट का हर माह रिफंड हासिल करना अनिवार्य है.
जीएसटीआर-2. डीलर का परचेज डिटेल जीएसटी पाेर्टल में जीएसटीआर-2 ए में दिखाना अनिवार्य है. यदि किसी का परचेज डिटेल छूट गया है या नहीं दिख रहा है, ताे वह अपनी बुक से इसका मिलान कर 31 से पहले अपडेट कर दें, जिससे माल खरीद रहे हैं, उसके द्वारा परचेज की इंट्री की गयी है या नहीं, चेक कर लें.
यदि उत्पादित या कच्चा माल है, तो उसका वैल्यूशन आइटीसी स्टॉक का 31 मार्च तक कर लें
आैद्याेगिक इकाइयाें में यदि उत्पादित माल है, तैयार माल है, कच्चा माल है, उसका वैल्यूशन आइटीसी स्टॉक का 31 मार्च तक कर लें. सेंट्रल एक्साइज में क्लाेजिंग स्टॉक आैर फिनिशिड गुड्स पर टैक्स निकालने का प्रावधान था, जाे अब जीएसटी में नहीं है. मूल्य ह्रास (डेपरिसिएशन) कैपिटल गुड्स. कैपिटल गुड्स, बिल्डिंग काे छाेड़कर जिस पर आइटीसी क्लेम किया है,
उस पर डेपरिसिएशन के बाद जाे टैक्स जुड़ा हुआ है उसे इग्नाेर करना हाेगा. टैक्स अमाउंट काे घटाकर रिटर्न दाखिल करें. एंटी प्राेफिंटिंग. एंटी प्राेफिंटिंग विंग 2016-17 का जाे ग्रॉस प्राेफिट डिक्लेयर किया है, वे 2017-18 के ग्रॉस प्राेफिट से कंपेयर करेंगे. हर डीलर काे ध्यान रखना हाेगा कि कहीं वह एंटी प्राेफेटिंग के दायरे में ताे नहीं आ रहे हैं.