सातवें वेतनमान में शिक्षकों के वेतन मद में 39 माह में 50% ही अनुदान देगा केंद्र

Updated at : 17 Nov 2017 5:59 AM (IST)
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सातवें वेतनमान में शिक्षकों के वेतन मद में 39 माह में 50% ही अनुदान देगा केंद्र

राज्यों पर पड़ेगा बड़ा बोझ, अनुदान में मिलने वाली करीब दो तिहाई राशि की हुई है कमी प्राचार्यों को नहीं मिल सकेगी प्रोफेसर ग्रेड में प्रोन्नति, पीएचडी, एमफिल के इंक्रीमेंट में कमी जमशेदपुर/चाईबासा : सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू होने की उम्मीद पाल बैठे विश्वविद्यालय एवं कॉलेज शिक्षकों के लिए हैरान करने वाली खबर […]

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राज्यों पर पड़ेगा बड़ा बोझ, अनुदान में मिलने वाली करीब दो तिहाई राशि की हुई है कमी

प्राचार्यों को नहीं मिल सकेगी प्रोफेसर ग्रेड में प्रोन्नति, पीएचडी, एमफिल के इंक्रीमेंट में कमी
जमशेदपुर/चाईबासा : सातवें वेतन आयोग की सिफारिश लागू होने की उम्मीद पाल बैठे विश्वविद्यालय एवं कॉलेज शिक्षकों के लिए हैरान करने वाली खबर है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भेजी गयी सिफारिश में छठवें वेतनमान की अपेक्षा सातवें वेतनमान के अनुदान में भारी कटौती की गयी है. पूर्व के मुकाबले केंद्र से राज्यों को मिलने वाली राशि की दो तिहाई राशि कम हो गयी है. नये मापदंड के अनुसार सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार केंद्र राज्यों को शिक्षकों के वेतन मद में दी जाने वाली राशि का 50 फीसदी हिस्सा 39 माह तक वहन करेगा.
छठवें वेतन आयोग की सिफारिशों में केंद्र सरकार ने 51 माह में 80 फीसदी राशि अनुदान के रूप में देती रही. अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ ने सिफारिशों के समग्र अध्ययन के बाद इन बिन्दुओं पर अपनी आपत्ति दर्ज की है. इसके अलावा 8000 रुपये की एजीपी पाने वाले आइआइटी शिक्षकों को जहां 1,01, 500 रुपये मिलेंगे, वहीं समान ग्रेड पे वाले विवि व कॉलेज शिक्षकों को वेतन मद में 79,800 रुपये मिलेंगे. ऐसे में विवि व काॅलेजों में सेवा देने वाले शिक्षकों को सीधे-सीधे 20,000 रुपये का मासिक घाटा हो रहा है.
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में घोर अन्याय हुआ है. आर्थिक रूप से कमजोर झारखंड जैसे राज्यों के लिए विवि व शिक्षकों को सातवें वेतनमान की सिफारिश को लागू कर पाना कठिन होगा. शिक्षक अपने अधिकारियों के लिए 30 नवंबर को विवि व कॉलेज मुख्यालय में धरना देंगे. काला बिल्ला लगायेंगे.
– डॉ विजय कुमार पीयूष, राष्ट्रीय सचिव, एआइएफयूसीटीओ
एक तरफ जहां 8000 रुपये के पे स्केल पर आइआइटी के शिक्षकों को ज्यादा वेतन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर विवि व कॉलेजों में सेवा देने वाले शिक्षकों को कम भुगतान हो रहा है. पीएचडी व एमफिल पर मिलने वाले इंक्रीमेंट में कटौती की गयी है. इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.
– डॉ संजीव कुमार, शिक्षक नेता, झारखंड
प्राचार्य पद पर सेवा देने वाले शिक्षकों की प्रोन्नति को बाधित किया जाना पूरी तरह गलत है. प्राचार्य बनने के साथ ही शिक्षकों के लिए प्रमोशन के सारे रास्ते बंद कर दिये गये हैं. अगर ऐसे ही नियम बनते रहते, तो कुछ दिनों में कॉलेजों में प्राचार्य की कुर्सी पर कोई बैठने वाला नहीं मिलेगा.
– डॉ बीएन प्रसाद, नवनियुक्त प्राचार्य, कोल्हान विवि
इन मदों में भी हुई है कटौती
सरकार की सिफारिश का अध्ययन करने के बाद अखिल भारतीय विवि एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ ने कई बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज की है. दावा किया है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिश में प्रावधान किया गया है कि प्राचार्य पद पर सेवा देने वाले शिक्षकों को अधिकतम एसोसिएट प्राेफेसर तक ही प्रोन्नति मिलेगी. एेसे में वह हमेशा के लिए प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नति पाने के अधिकार से वंचित हो रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ एमफिल व पीएचडी की उपाधि पद दिये जाने वाले इंक्रीमेंट में कटौती की गयी है. इसके अलावा भत्तों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गयी है.
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