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ग्रामीणों ने देवी-देवताओं से की अच्छी बारिश की प्रार्थना

Updated at : 08 Jul 2024 8:48 PM (IST)
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खोड़ीपहाड़ी पहाड़ की पूजा एक ऐसा पर्व है जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक बंधनों को भी मजबूत करता है. यह पूजा क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण आयोजन है. यहां वे अपने देवी-देवताओं के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं.

बागबेड़ा के रानीडीह मेें बारिश के लिए प्रार्थना करते ग्रामीण

खोड़ीपहाड़ी पहाड़ की पूजा एक ऐसा पर्व है जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक बंधनों को भी मजबूत करता है. यह पूजा क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण आयोजन है. यहां वे अपने देवी-देवताओं के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं.

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जमशेदपुर: जुलाई का महीना प्रवेश कर चुका है. लेकिन मानसून की बारिश का अभी तक कोई अता-पता नहीं है, जिससे किसान गहरे चिंतन में पड़ गए हैं. बिना बारिश के खेत सूखे पड़े हैं और किसान यह सोचने पर मजबूर हैं कि बिचड़ा कब लगायें और कब उसकी रोपनी करें. आसमान में काले बादल छाए रहते हैं, पर वे झमाझम बारिश के रूप में धरती पर नहीं गिर रहे. यह स्थिति किसानों की परेशानियों को और भी बढ़ा रही है. इस चिंता और तनाव के बीच रविवार बागबेड़ा क्षेत्र के रानीडीह गांव के पास खरकई नदी के किनारे ग्रामवासियों ने एक विशेष पूजा अर्चना का आयोजन किया. गांव के लोग देवी-देवताओं से अच्छी बारिश की प्रार्थना करने के लिए एकत्रित हुए. इस पूजा में भाग लेने वाले सभी ग्रामवासी उत्साह और उम्मीद से भरे हुए थे. उनकी आंखों में एक ही आशा थी – जल्दी ही अच्छी बारिश हो ताकि उनकी फसलों की बुआई और रोपाई सुचारू रूप से हो सके. वहीं क्षेत्र में जलस्तर भी काफी नीचे चला गया है. बारिश होगी तो भूगर्भीय जलस्तर भी ठीक होगा. इस विशेष पूजा अर्चना व प्रार्थना कार्यक्रम का नेतृत्व सुशील किस्कू, बहादुर किस्कू, अविनाश प्रसाद, राजेन मुंडा, जवाहर दास, ननिका जारिका, फूलो सोरेन, बसंती बेसरा, सुशीला टुडू, जसमी सोरेन आदि कर रहे थे.

खोड़ीपहाड़ी पहाड़ पूजा: एक सांस्कृतिक धरोहर
चाकुलिया प्रखंड के रेंगड़पहाड़ी गांव के समीप स्थित खोड़ीपहाड़ी पहाड़, हर साल खोड़ीपहाड़ी संस्कृति रक्षा समिति के नेतृत्व में श्रद्धा और भक्तिभाव से पूजा जाता है. इस पूजा में रेंगड़पहाड़ी, सोनाहारा, सालुआडीह, कदमाशोली, बढ़शोल, कालिदासपूर, मालकुंडी, सितबड़िया, भालूकापहाड़ी, हथियाशोली, आमलागुड़ा और लुआग्राम समेत 12 मौजा के ग्रामीण हिस्सा लेते हैं. यह पूजा क्षेत्र में अच्छी बारिश और गांव की खुशहाली की कामना के लिए आयोजित की जाती है. पूजा के समय खोड़ीपहाड़ी पहाड़ के नीचे भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. इस अवसर पर एक विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ-साथ झारखंड और बंगाल के लोग भी शामिल होते हैं. यह मेला न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है. इसमें लोग आपसी मेलजोल और सामाजिक बंधनों को मजबूत करने का अवसर पाते हैं.

खोड़ीपहाड़ी पहाड़ की पूजा पर लोगों का आस्था
खोड़ीपहाड़ी पहाड़ की पूजा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में समृद्धि और खुशहाली लाना है. ग्रामीणों का मानना है कि इस पूजा से अच्छी बारिश होती है, जिससे उनकी कृषि कार्यों में उन्नति होती है. यह पूजा उनके जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गई है और पीढ़ी दर पीढ़ी इस परंपरा को निभाया जा रहा है. खोड़ीपहाड़ी पहाड़ पूजा न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह एक ऐसा आयोजन है. जो स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित और सहेजने का काम करता है. इसमें भाग लेने वाले सभी लोग एक साथ मिलकर अपने देवी-देवताओं की आराधना करते हैं और क्षेत्र की समृद्धि की कामना करते हैं. यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इस तरह खोड़ीपहाड़ी पहाड़ की पूजा एक ऐसा पर्व है जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक बंधनों को भी मजबूत करता है. यह पूजा क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण आयोजन है. यहां वे अपने देवी-देवताओं के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति प्रकट करते हैं.

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Dashmat Soren

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By Dashmat Soren

Dashmat Soren is a contributor at Prabhat Khabar.

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