नल जल योजना : बरही व चौपरण के 35 हज़ार घरों में से एक भी घर को नहीं मिला नल जल का पानी

जल जीवन मिशन के तहत बरही प्रखंड और चौपारण प्रखंड में वर्ष 2023 के मध्य में एक नयी जलापूर्ति योजना का शुभारंभ हुआ था.
गर्मी लगते यहां पानी की समस्या गहराने लगी है बरही. जल जीवन मिशन के तहत बरही प्रखंड और चौपारण प्रखंड में वर्ष 2023 के मध्य में एक नयी जलापूर्ति योजना का शुभारंभ हुआ था. इस योजना का उद्देश्य था कि 27 महीने के भीतर बरही के सात हजार और चौपारण के 28 हजार घरों तक स्वच्छ नल जल पहुंचे. कुल 200 करोड़ की लागत वाली इस योजना में केवल बरही हिस्से के लिए 55 करोड़ रुपये निर्धारित किये गये थे. टेंडर चेन्नई की श्रीराम एपीसी कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिला, जिसने कुछ काम हर्ष कंस्ट्रक्शन को सब-कॉन्ट्रैक्ट में दिया. लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी एक भी घर तक पानी नहीं पहुंच पाया है. अधूरा निर्माण कार्य बरही के बेंदगी पंचायत स्थित जवार पहाड़ी पर 3.1 एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और चौपारण के सिंगरावा में 14 एमएलडी क्षमता का प्लांट अधूरा पड़ा है. इसी तरह दो लाख 30 हजार से पांच लाख 60 हजार लीटर क्षमता वाले 12 जल मीनार भी निर्माणाधीन हैं. इनमें बरही के हरला और दौरवा, चौपारण के पडरिया, मध्यगोपाली, चैथी, रामपुर, पाण्डेयबारा, सिंगरावां और डेबो शामिल हैं. पाइपलाइन का धीमा काम योजना के अनुसार 800 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जानी थी, जिससे इंटेक वेल से दोनों वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक और वहां से 12 जल मीनारों तक पानी पहुंचे. इसके बाद इन जल मीनारों से 35 हजार घरों तक जल वितरण होना था. लेकिन पाइपलाइन का काम बेहद धीमा है और अधिकांश पंचायतों तक पाइप ही नहीं पहुंची है. पंचायत प्रतिनिधियों ने चिंता जतायी बेंदगी पंचायत के मुखिया सिकंदर राणा ने कहा कि उनके पंचायत में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बन रहा है, लेकिन एक भी घर तक पाइपलाइन नहीं पहुंची. बरही पश्चिमी पंचायत के मुखिया शमशेर आलम ने गर्मी में जल संकट की गंभीरता बतायी. बरही पूर्वी पंचायत की प्रतिनिधि मीनू देवी ने कहा कि जनवरी-फरवरी से ही धोबी टोला में जल संकट शुरू हो जाता है. कोनरा पंचायत की मुखिया यास्मीन तबस्सुम और करसो पंचायत की ऊषा राम ने भी यही शिकायत की कि जलमीनार तो बन गया है, लेकिन पाइप कनेक्शन नहीं हुआ. महिलाओं पर सबसे अधिक बोझ मुखिया संघ के अध्यक्ष विजय यादव सहित अन्य मुखियाओं ने कहा कि गर्मी में महिलाओं को पानी के लिए सबसे अधिक परेशानी होती है. उन्हें दूर-दूर तक भटकना पड़ता है. यदि योजना समय पर पूरी हो जाती तो ग्रामीण महिलाओं को इस जद्दोजहद से मुक्ति मिल जाती. योजना पूरी क्यों नहीं हुई, जांच की जायेगी बरही अनुमंडलाधिकारी जोहन टुडू ने कहा कि योजना निर्धारित समय पर क्यों पूरी नहीं हो पायी. इसकी जांच की जायेगी. यदि संवेदक दोषी पाया गया तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी.
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