जीवन का लक्ष्य आत्मा की निर्मलता

श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के छठे दिन सिद्धों की महिमा का गान
हजारीबाग. श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान का षष्ठम दिवस रविवार को संपन्न हुआ. पूरा मंदिर परिसर णमो सिद्धाणं के उच्चारण से गुंजायमान रहा. भक्त पूजन, पाठ, अर्घ्य एवं आराधना से आत्मशुद्धि की भावना में लीन रहे. विधान के प्रत्येक मंत्र और प्रत्येक अर्घ्य ने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि जीवन का वास्तविक लक्ष्य आत्मा की निर्मलता और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होना है. श्रीजी की पावन शांतिधारा करने का सौभाग्य हरक चंद, संजय, संगीता, मनोज गोधा परिवार के साथ सुनील हर्ष अजमेरा, राजेश पाटोदी, अरुण, ललिता बोहरा को प्राप्त हुआ. उन्होंने समाज की सुख-समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति की कामना की. आज के विधान के मुख्य प्रायोजक हरक चंद, संजय, संगीता एवं मनोज गोधा परिवार व ईषा, सिल्की, टिशू, श्वेता सेठी, किटी विनायका थे. संध्या में महाआरती के बाद जैन महिला समिति की ओर से जितने भी विधान में पात्र बने हैं, उनका विनती का कार्यक्रम हुआ. राकेश टीकमगढ़ की टीम ने भजन प्रस्तुत किया. जिसपर भक्त झूमते नजर आये. मीडिया हेड विजय जैन लुहाड़िया ने कहा कि ऐसे दिव्य आयोजन से पूरे समाज में धर्म, संयम और सद्भावना की पावन धारा निरंतर प्रवाहित होती रही. जैन महिला समिति के अध्यक्षा प्रेमा टोंग्या व सचिव निर्मला लुहाड़िया ने कहा कि सातवें दिन महा अर्घ्य की तैयारी, उत्साह और आध्यात्मिक उन्नति पर आधारित होगी.
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