संस्कृत सभी भाषाओं की जननी

Edited by SUNIL PRASAD
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भाग्यमणि भवन में गीता जयंती समारोह पर हुई कई प्रतियोगिता

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हजारीबाग. संस्कृत भारती की ओर से भाग्यमणि भवन में गीता जयंती समारोह का आयोजन किया गया. अतिथियों एवं अधिकारियों ने सरस्वती माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की. मंगलाचरण ऋषिकांत और चंदन ने किया. स्वागत भाषण ओमप्रकाश गुप्ता ने किया. उन्होंने बताया कि भारत की आत्मा भारतीय संस्कृति है. संस्कृति की आत्मा संस्कृत है. हमें संस्कृत के उत्थान में प्रयत्नशील रहना चाहिए. डॉ सुबोध कुमार साहू ने कहा कि गीता के श्लोक का अध्ययन, ज्ञान और आचरण सभी लोगों को करना चाहिए. मुख्य अतिथि मनोज कुमार गुप्ता (रिटायर एजीएम टाटा ट्रस्ट) ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है. डॉ ताराकांत शुक्ल ने कहा कि गीता विश्व की एकमात्र ऐसी ग्रंथ है, जो मानव धर्म की शिक्षा देती है. जनपद अध्यक्ष डॉ नकुल पांडेय ने कहा कि जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कर्ष प्राप्त करना चाहते हैं, वे गीता पढ़ें. अखौरी रविंद्र प्रसाद ने कहा कि गीता एक सर्वमान्य ग्रंथ है. समारोह में निबंध, श्लोक वाचन, श्लोक व्याख्यान, भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गयी. इसमें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन-तीन प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया. निर्णायक मंडली में रामसेवक मिश्र, मनीष चंद्र मिश्र और डॉ नकुल पांडेय शामिल थे. समारोह में सभी विद्यार्थियों को श्रीमद भगवत गीता पुस्तक का वितरण किया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में सुधांशु, प्रवीण, पुरुषोत्तम, बिरेंद्र ने अहम भूमिका निभायी

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