चौपारण. एनएच-19 पर दनुआ घाटी में वाहन दुर्घटना पर काबू पाने के लिए सांसद के प्रयास से एनएचएआइ ने नयी पहल शुरू की है. खतरनाक मोड़ और ढलान के कारण घाटी में प्रतिदिन दुर्घटनाएं हो रही थीं. मध्य प्रदेश की तर्ज पर दनुआ घाटी में रेड टैपिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस विशेष लाल परत के बिछाये जाने से न केवल वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार पर अंकुश लगेगा, बल्कि मोड़ों पर टायर की पकड़ भी मजबूत होगी. इस घाटी में हथिया बाबा मंदिर से जोड़राही पुल तक दुर्घटना संभावित क्षेत्र माना जाता है. इसी हिस्से में रेड टैपिंग का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है. इस तकनीक से घने कोहरे और बारिश के दौरान होने वाले हादसों में कमी आयेगी. फिलहाल एक सप्ताह के दौरान इस क्षेत्र में कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है. जिसे इस तकनीक के शुरुआती प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है. दनुआ घाटी में आये दिन वाहन दुर्घटना को देखते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और एनएचएआइ के शीर्ष अधिकारियों से मिलकर ज्ञापन सौंपा था. सांसद ने ब्लैक स्पॉट की भयावह स्थिति से मंत्रालय को अवगत कराया था. क्या है रेड टैपिंग तकनीक : एनएचएआइ के पीडी मनोज पांडेय ने बताया कि रेड टैपिंग सड़क की ऊपरी सतह पर घर्षण बढ़ाती है. जिससे ब्रेक लगाने पर वाहन जल्दी और सुरक्षित रुकते हैं. लाल रंग होने के कारण यह कोहरे या रात के अंधेरे में ड्राइवरों को सचेत करती है कि आगे ढलान या मोड़ है. यह सामान्य बिटुमिन की तुलना में अधिक टिकाऊ होती है. भारी वाहनों का दबाव सहने में सक्षम है.
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