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आधुनिकता में संताली युवा नहीं भूलें अपनी भाषा-संस्कृति, हजारीबाग में बोले शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन

Updated at : 30 May 2025 9:32 PM (IST)
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Ramdas Soren in hazaribagh

मंचासीन शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन समेत अन्य

हजारीबा जिले के चुरचू प्रखंड की बहेरा में संताल समाज दिशोम मांझी परगना के 29वां स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया. झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने कहा कि संताल समाज की पहचान भाषा, सांस्कृति, पारंपरिक नृत्य-संगीत और रीति-रिवाज है. इससे बरकरार रखने की जरूरत है. आधुनिकता के दौर में युवा इसे भूलते जा रहे हैं.

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चरही(हजारीबाग),आनंद सोरेन- हजारीबा जिले के चुरचू प्रखंड की बहेरा पंचायत अंतर्गत सीसीएल तापीन साउथ जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में संताल समाज दिशोम मांझी परगना के 29वां स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया. मौके पर मुख्य अतिथि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता एवं निबंधन मंत्री रामदास सोरेन और विशिष्ट अतिथि संताल समाज दिशोम मांझी परगना के दिशोम मांझी हाड़ाम सह दर्जा प्राप्त मंत्री फागु बेसरा थे. कार्यक्रम का संचालन प्रदीप सोरेन और नरेश मुर्मू ने किया. मंत्री रामदास सोरेन ने कहा कि संताल समाज की पहचान भाषा, पारंपरिक नृत्य संगीत और वेशभूषा, रीति-रिवाज है. इससे बरकरार रखने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में युवा पीढ़ी भाषा-संस्कृति को भूलते जा रहे हैं. अपनी भाषा-संस्कृति को कायम रखने के लिए युवा पीढ़ी को भी आगे आने की जरूरत है.

संताल एकता की मजबूती पर जोर


संताल समाज दिशोम मांझी परगाना के दिशोम मांझी हाड़ाम सह दर्जा प्राप्त मंत्री फागु बेसरा ने कहा कि संताल एकता को मजबूत करना है. अपनी भाषा, संस्कृति और धर्म को अक्षुण्य बनाए रखना है. जल, जंगल और जमीन की रक्षा, अपने अस्तित्व की रक्षा एवं संविधानिक अधिकार के लिए संघर्ष तेज करना है.

परंपरागत संताली नृत्य-संगीत से समां बांधा


संताल समाज दिशोम मांझी परगाना का स्थापना दिवस समारोह विभिन्न गांवों से आये संताली कलाकारों ने परंपरागत ढोल मांदर से नृत्य व संगीत से समां बांधा. महिला-पुरुषों के लिए तीर धनुष प्रतियोगिता का भी आयोजन गया. मौके पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों व कलाकारों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया.

ये थे उपस्थित


मौके पर संताल समाज दिशोम मांझी परगाना के मरांग परगना सोनाराम हेम्ब्रोम ,दिशोम जोगवा एतो बास्के , डांडी प्रमुख दीपा देवी ,सोहोक मांझी बाबा आरडी हांसदा, तालसा मांझी बाबा दुर्गा चरण मुर्मु ,देश परगाना बैजू मुर्मू, मरांग बुरु संस्थान के अध्यक्ष रामलाल मुर्मु ,विष्णु किस्कू ,ओडिशा से सोमोय टूडू, सोहोक मांझी बाबा रमेश हेम्ब्रोम , पन्नालाल मुर्मु , प्रदीप सोरेन, गहन बेसरा , मोहन सोरेन, कादो मरांडी , राजेश हंसदा ,रामकिशोर मुर्मू , जेठुआ मांझी ,गणेश टूडू ,संजय मुर्मु , लखीराम मांझी ,संजय टुडु ,लालजी बेसरा ,लखीराम मुर्मु ,रोयल हंसदा ,बब्ली सोरेन ,हीरालाल मांझी ,महेश मुर्मु ,महालाल हंसदा ,महादेव सोरेन, मनोज टुडु ,सुरेश मुर्मु ,नरेश सोरेन,रमेश सोरेन , आनंद मराण्डी ,बिटका मांझी ,सहदेव किस्कू सहित हज़ारों की संख्या में लोग मौजूद थे.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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