बजट में शिक्षा, रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

Updated at : 21 Feb 2025 4:47 PM (IST)
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बजट में शिक्षा, रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

झारखंड बजट को लेकर प्रभात खबर का बजट परिचर्चा संत कोलंबा कॉलेज में

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हजारीबाग. झारखंड बजट को लेकर प्रभात खबर का बजट परिचर्चा संत कोलंबा कॉलेज में आयोजित की गयी. परिचर्चा में संत कोलंबा कॉलेज के बीए अर्थशास्त्र और इतिहास विभाग के विद्यार्थियों ने भाग लिया. महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने आने वाले बजट को लेकर खुल कर अपने विचार रखे. छात्रों ने कहा कि सरकार का बजट ही राज्य के भविष्य की रूपरेखा तय करेगा. विद्यार्थियों ने शिक्षा, रोजगार, ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा, कौशल प्रशिक्षण, सिंचाई, जंगल बचाने सहित कई क्षेत्रों में इस बजट में ध्यान देने पर जोर दिया. छात्रों ने कहा कि राज्य में संसाधनों की कमी नहीं है. संसाधनों का सही उपयोग से ही राज्य का भला होगा. अर्थशास्त्र विभाग के छात्र अरुण कुमार कुशवाहा ने कहा कि झारखंड सरकार को इस बार के बजट में रोजगार सृजन और शिक्षा के क्षेत्र में अधिक राशि खर्च करने की ओर ध्यान देना चाहिए. कृषि के विकास के लिए सिंचाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. आशीष कुमार ने कहा कि आने वाले बजट में सरकार को स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले साल से ज्यादा राशि देने की जरूरत है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने को लेकर वहां की सड़कों के लिए अलग से राशि की व्यवस्था हो. कई बार ग्रामीण क्षेत्र की खराब सड़कों की वजह से कृषि उत्पाद समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाता है.

सुबोध कुमार ने कहा कि इस बार के बजट में लोगों के हुनर के विकास के लिए अलग से प्रावधान हो. इससे ग्रामीण क्षेत्र की बेरोजगारी कम होगी.

इतिहास विभाग के विवेक कुमार धान ने कहा कि आधुनिक सिंचाई तकनीक पर राज्य सरकार को अधिक से अधिक सब्सिडी देने की जरूरत है. ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा पर अधिक पैसे खर्च किया जाये. ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है.

अर्थशास्त्र विभाग के जयंत कुमार ने कहा कि झारखंड में संसाधन काफी है. श्रम शक्ति भी राज्य में उपलब्ध है. संसाधन और श्रम शक्ति के सदुपयोग पर ज्यादा खर्च करने की जरूरत है. इससे अर्थव्यवस्था में भी गति आयेगी.

अर्थशास्त्र विभाग के कीर्ति भारती ने कहा कि झारखंड के जंगल पर भी राशि खर्च करने की जरूरत है. आधी से अधिक जनजाति आबादी इस पर निर्भर है.

इतिहास विभाग की नीतू कुमारी ने कहा कि रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में सरकार को और ज्यादा ध्यान देना होगा. शिक्षा नीति रोजगार परख होनी चाहिए.

चंदन राज मौर्य ने कहा कि आम जनता के टैक्स का सदुपयोग होना चाहिए. सब्सिडी और राजनीतिक लाभ के लिए आम जनता के पैसे का दुरुपयोग कम करना चाहिए. लोगों का पैसा राज्य के विकास में खर्च किया जाये.

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