हजारीबाग. प्रभु रूपांतरण महागिरजाघर कैथोलिक आश्रम हजारीबाग में सुबह छह बजे पवित्र राख बुध के अवसर पर पूजा बिशप आनंद के नेतृत्व में हुआ. बिशप आनंद के साथ चर्च के पल्ली पुरोहित फादर एंथोनी, फादर रेमंड, फादर टॉमी, फादर सुशील, फादर समीर शामिल थे. ईस्टर पर्व की शुरुआत से पहले राख बुद्ध पूजा हुई. बिशप आनंद ने अपने संदेश में कहा राख बुध से ईसाई काथलिक चालीसा का समय शुरू करते हैं. यह चालीस दिन का होता है. इस समय काथलिक विश्वासी ईसा मसीह के दुखभोग, मृत्यु और पुनरुत्थान पर मनन चिंतन उपवास, परहेज, सेवा दान एवं प्रार्थना में समय बिताते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य अपने मानव कमजोरियों और पापों के लिए पश्चाताप कर ईश्वर तथा अपने पड़ोसी से मेल मिलाप करना. राख बुध के दिन विश्वासियों के माथे पर क्रूस का चिह्न लगाते हैं. यह जीवन की नाशवान प्रकृति की याद दिलाता है. मनुष्य समय रहते अपने पापों के लिए पश्चाताप कर ईश्वर तथा अपने पड़ोसी से मेल मिलाप कर ले. हजारीबाग चालीसा का यह पुण्य काल राख बुद्ध से शुरू होता है. पूजन समारोह में संगीत और प्रार्थना धर्म बहनों ने मधुर संगीत गाकर चर्च को भक्तिमय बना दिया. बिशप आनंद ने कहा हर चालीसा पुण्य काल में प्रत्येक शुक्रवार चार बजे से प्रार्थना एवं क्रूस का आयोजन किया जाता है.
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