जिले में 100 में 15 व्यक्ति मलेरिया से प्रभावित

Published at :27 Apr 2017 8:17 AM (IST)
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जिले में 100 में 15 व्यक्ति मलेरिया से प्रभावित

हजारीबाग : जिले में प्रत्येक साल 100 में से 15 व्यक्ति संभावित मलेरिया के बुखार से तपते हैं. विभिन्न प्रखंडों से बुखार से पीडित व्यक्तियों का जांच प्रत्येक दिन एक से डेढ़ हजार लोगों का हो रहा है. पिछले एक वर्ष में मलेरिया विभाग ने एक लाख 70 हजार 226 संभावित मलेरिया से पीड़ित लोगों […]

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हजारीबाग : जिले में प्रत्येक साल 100 में से 15 व्यक्ति संभावित मलेरिया के बुखार से तपते हैं. विभिन्न प्रखंडों से बुखार से पीडित व्यक्तियों का जांच प्रत्येक दिन एक से डेढ़ हजार लोगों का हो रहा है. पिछले एक वर्ष में मलेरिया विभाग ने एक लाख 70 हजार 226 संभावित मलेरिया से पीड़ित लोगों की जांच की. मलेरिया विभाग ने हर रोज 467 लोगों के बुखार की जांच की.
इस बीमारी से निबटने के लिए जिला प्रशासन के पास कोई व्यवस्था नहीं है. हालांकि मलेरिया से मरनेवालों की संख्या शून्य बताती है. जबकि गैर सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर साल 100 से डेढ़ सौ लोग मलेरिया की वजह से काल के गाल में समा गये. मलेरिया विभाग के अनुसार दस पीएचसी और सदर अस्पताल में 121 पीएफ मलेरिया से ग्रसित रोगियों की पहचान हुई. इनमें से 22 मरीजों की स्थिति काफी खतरनाक थी.
मलेरिया से निबटने के लिए कोई व्यवस्था नहीं : मलेरिया जमे पानी में उसके लार्वा से पनपता है. लेकिन मलेरिया के जीवन चक्र को तोड़ने के लिए विभाग के पास मानव संसाधन व अन्य उपकरण की घोर कमी है.
पिछले कई वर्षों से मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है. लेकिन मच्छरों के उन्मूलन में कर्मचारियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है. 1977 में हजारीबाग शहर में मलेरिया से निबटने के लिए दो निरीक्षक, 20 सुपरवाइजर फील्ड वर्कर और 60 फील्ड वर्कर कार्यरत थे. जो प्रत्येक सात दिन पर शहर में जमा पानी व नालियों में एवेट को पानी में घोल कर छिड़काव किया जाता था. जिससे लारिवल सेडेल स्कीम के तहत मच्छरों की जीवन चक्र को तोडा जाता था. लेकिन वर्तमान समय में दो इंस्पेक्टर, एक सुपरवाइजर और तीन फील्ड अॉफिसर की बदौलत इस काम को किया जा रहा है.
मलेरिया विभाग के पास न फॉगिंग मशीन है न दवा : शहर में मलेरिया उन्मूलन के लिए मलेरिया विभाग के पास फॉगिंग मशीन पिछले कई साल से खराब है. इस फॉगिंग मशीन संचालन के लिए विभाग के पास गाड़ी तक उपलब्ध नहीं है. फॉगिंग मशीन में उपयोग होनेवाला दवा पैराथरम पिछले एक साल से खरीदी नहीं गयी है. हालांकि विभाग दावा करता है कि खराब फॉगिंग मशीन से भी शहर के विभिन्न वार्डों व मुहल्लों में दवा की छिड़काव की है.
नगर निगम में तीन फॉगिंग मशीन : शहर के सभी क्षेत्रों में मलेरिया से बचाव के लिए तीन फॉगिंग मशीन मंगायी गयी है. इनमें से दो मशीन पिछले साल से खराब है. एक फॉगिंग मशीन है. जिससे कभी कभार दवा का छिड़काव कार्य किया जाता है.
कर्मचारियों की कमी है : मलेरिया विभाग के बायोलॉजिस्ट महेंद्र पाल ने बताया कि कर्मचारियों की कमी की वजह से छिड़काव कार्य प्रभावित हो रहा है. विभाग के पास आरडीटी और एसीटी किट उपलब्ध है.
क्षेत्रफल के अनुसार फॉगिंग मशीन पर्याप्त नहीं है : नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी आशीष कुमार ने बताया कि फॉगिंग मशीन में प्रयोग होनेवाली 40 लीटर दवा उपलब्ध है. दवा का आवंटन नहीं आने के बाद भी नगर निगम दवा की खरीदारी की गयी है. क्षेत्रफल के अनुसार फॉगिंग मशीन पर्याप्त नहीं है. इसलिए शीघ्र ही फॉगिंग मशीन की खरीदारी की जायेगी. सभी 32 वार्डों में एक साथ फॉगिंग करायी जायेगी.
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