एक लाख कुपोषित बच्चे और 45 हजार महिलाएं रेडी टू इट से वंचित
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Feb 2017 8:35 AM (IST)
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हाल. हजारीबाग में चल रहा कुपोषण उन्मूलन का कार्यक्रम प्रभावित हजारीबाग : रेडी टू इट पोषाहार का लाभ जनवरी माह में एक लाख कुपोषित बच्चों समेत 45 हजार गर्भवती व धात्री महिलाओं को नहीं मिल पाया. इससे जिला में चल रहे कुपोषण उन्मूलन कार्यक्रम प्रभावित हुआ है. कार्यक्रम के माध्यम से कुपोषित बच्चों व माता […]
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हाल. हजारीबाग में चल रहा कुपोषण उन्मूलन का कार्यक्रम प्रभावित
हजारीबाग : रेडी टू इट पोषाहार का लाभ जनवरी माह में एक लाख कुपोषित बच्चों समेत 45 हजार गर्भवती व धात्री महिलाओं को नहीं मिल पाया. इससे जिला में चल रहे कुपोषण उन्मूलन कार्यक्रम प्रभावित हुआ है. कार्यक्रम के माध्यम से कुपोषित बच्चों व माता को पूरक पोषाहार दिया जाना है. मेसर्स कोटा दाल मिल, राजस्थान की ओर से हजारीबाग जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में रेडी टू फूड की आपूर्ति की जाती है.
जिले भर में 27 हजार कुपोषित बच्चे: आंकड़ों के मुताबिक हजारीबाग जिले के विभिन्न बाल विकास परियोजना में 27 हजार कुपोषित बच्चे हैं. इनमें 26,968 बच्चों का उम्र के हिसाब से वजन कम है. 135 बच्चे काफी कुपोषित हैं, जिनकी कभी भी मौत हो सकती है. इन्हें अधिक पूरक पोषाहार की जरूरत है. वहीं 481 बच्चे कुपोषित हैं.
क्यों नहीं मिला जनवरी में पोषाहार
रेडी टू इट फूड पोषाहार प्रत्येक माह जिला स्तर पर राज्य सरकार से मांग की जाती है. उसी के आधार पर राज्य सरकार आपूर्तिकर्ता कोटा दाल मिल को पोषाहार भेजने का आदेश देती है, लेकिन जनवरी माह में सरकार ने कुपोषितबच्चों के पोषक आहार की आपूर्ति के लिए आदेश नहीं भेजा, जिससे इस माह गर्भवती, धात्री एवं कुपोषित बच्चे पोषाहर से वंचित रह गये.
पोषाहार की मांग की गयी थी : समाज कल्याण पदाधिकारी
समाज कल्याण पदाधिकारी मथिलेश झा ने कहा कि हजारीबाग जिले में रेडी टू इट के लिए पूरक पोषाहार की मांग राज्य सरकार को भेज दी गयी थी. परियोजना निदेशक के सेवानिवृत्त होने की वजह से राज्य स्तर से आपूर्ति के लिए आदेश नहीं भेजा गया.
45000 धात्री महिलाओं को नहीं मिला पोषाहार
हजारीबाग में 50 से 60 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं. करीब 20 हजार गर्भवती महिलाएं और करीब 23000धात्री महिलाएं हैं. इन महिलाओं को जनवरी का पूरक पोषाहार नहीं बांटा गया. पूरक पोषाहार नहीं मिलने से इनके नवजात भी कमजोर होंगे.
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