सिल्ली. स्वर्णरेखा नदी के किनारे मकर संक्रांति के मौके पर बुधवार को आयोजित मेले के बाद स्वर्णरेखा नदी के दोनों ही किनारों पर गंदगी और कचड़े का अंबार लग गया है. गुरुवार को नदी के किनारे दूर तक गंदगी पसरी देखी गयी. लोगों ने पूजा पाठ एवं खाने पीने के बाद सारी चीजें नदी पर ही छोड़ दिया है. मेले में आनेवाले श्रद्धालु, पर्यटक, दुकानदार सभी ने अपने काम के बाद बेकार चीजों को नदी तट पर ही छोड़ दिया है. पूरे नदी परिसर में प्लास्टिक, पॉलिथिन, खाने के बाद प्लेट, जूठन, दुकानदारों की भी बेकार चीजें आदि पसरी पड़ी है. अधिकतर कचड़ा दिन भर नदी में जाता रहा. समय के साथ धीरे-धीरे ये सभी बेकार चीजें नदी में चली जायेगी. इससे नदी का साफ पानी बहुत प्रदूषित हो जाएगा. सभी जानते है कि स्वर्णरेखा नदी के पानी का उपयोग आम।लोग करते हैं. लेकिन इस प्रदूषण से समाजसेवियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, प्रशासन के लोग एवं आम लोग किसी को कोई परेशानी नहीं है.
हिंडालकों की ओर से सफाइकर्मी लगाये गये :
मेले के बाद के गंदगी को साफ करने के लिए गुरुवार को हिंडालको मुरी के प्रबंधन ने नदी के किनारे कई सफाईकर्मी को साफ करने के लिए लगाया है. गुरुवार की शाम तक कई सफाइकर्मी कचड़े को बोरे में उठा कर हटाते देखे गये. शाम तक सफाई का काम चल रहा था.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

