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जीव-जंतुओं का अस्तित्व खतरे में

इचाक : हजारीबाग जिले के वन्य प्राणी आश्रयणी रजडेरवा (नेशनल पार्क) में भीषण गर्मी के कारण जल संकट उत्पन्न हो गया है. पानी को लेकर आश्रयणी क्षेत्र के अंदर पल रहे जीव जंतुओं का अस्तित्व खतरे में है. अधिकांश नदी नाले व चेकडैम सूख चुके हैं. वहीं रजडेरवा डैम सूखने के कगार पर है. केज […]

इचाक : हजारीबाग जिले के वन्य प्राणी आश्रयणी रजडेरवा (नेशनल पार्क) में भीषण गर्मी के कारण जल संकट उत्पन्न हो गया है. पानी को लेकर आश्रयणी क्षेत्र के अंदर पल रहे जीव जंतुओं का अस्तित्व खतरे में है. अधिकांश नदी नाले व चेकडैम सूख चुके हैं. वहीं रजडेरवा डैम सूखने के कगार पर है.

केज के अंदर लगभग 100 जीव-जंतु हैं. रजडेरवा डैम से ही मवेशियों को पीने के लिए पानी छोड़ा जाता है. डैम में पानी सूख जाने के कारण सीमित पानी छोड़ा जाता है, जो नाले में जाते ही सूख जाता है. लगभग तीन किलोमीटर सोती के बीच तीन चेकडैम बनाये गये हैं. बालू भर जाने की वजह से तीनों चेकडैम सूख चुके हैं. मात्र एक कच्च चेकडैम केज के अंदर बना है. उसी चेकडैम में कुछ पानी है. मवेशियों के लिए प्यास बुझाने के लिए कच्च चेकडैम ही सहारा है.

नदी व डैम सूखे : कैले नदी, पोखरिया नाला पूरी तरह सूख चुका है. वहीं आश्रयणी क्षेत्र के बाहर बना बाघमारा चेकडैम भी सूख चुका है. आश्रयणी क्षेत्र में खुले विचरण करनेवाले जीव-जंतु इस डैम का पानी पीते थे. रजडेरवा का बड़ा डैम सूखने के कगार पर है, जिस कारण जल संकट उत्पन्न हुआ है. डैम में सिर्फ बांध के सामने के हिस्से में ही पानी है. केज के अंदर जानवरों को चारा एवं पानी के लिए एक दर्जन से अधिक नाद बनाये गये हैं. नाले सूखने की स्थिति में दूसरे जगह से पानी नाद में भरा जाता है, पर कई नाद सूखे पाये गये.

सौ से अधिक जीव जंतु : केज के अंदर 70-80 हिरण, छह नील गाय, चार सांभर, पांच कोटरा के अलावा सैंकड़ों बंदर, लोमडी व अन्य जीव जंतु हैं, जबकि केज के बाहर भी वन विभाग द्वारा छोड़े गये जीव जंतु के अलावा अन्य जंगली जानवर देखे जाते हैं. पानी की समस्या को लेकर आये दिन केज के बाहर रहनेवाले हिरण, कोटरा एनएच 33 पथ पर विचरण करते अदा-कदा देखे जाते हैं.

वहीं आश्रयणी से सटे कैले, सिझुआ, दांगी, दोनई व अन्य गांव में भी पानी के तलाश में भटकते हिरण गांव में घुस जाते हैं. कई बार ग्रामीणों ने पकड़ कर वन विभाग को सौंपा है.

क्या कहते हैं अफसर

रेंजर गोपाल चंद्रा ने कहा कि केज के अंदर सोती भले ही सूखा है, लेकिन आश्रयणी क्षेत्र में कच्च तालाब, महतो आहार, रजडेरवा डैम, सालपर्णी डैम में पानी है. दो माह तक पानी की समस्या नहीं होगी. फिलहाल सूखे सोती में वाटर हॉल को गड्ढा किया जायेगा, ताकि जीव-जंतु को आसानी से पानी मिल सके. उन्होंने बताया कि बरसात के पानी को रोकने के लिए कई योजनाओं का प्रस्ताव लिया गया है. बांध व तालाब बन जाने से भविष्य में आश्रयणी क्षेत्र में पानी का संकट उत्पन्न नहीं होगा.

Prabhat Khabar Digital Desk
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