पुरस्कार लौटाने के पीछे की राजनीति चिंताजनक

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हजारीबाग : साहित्य अकादमी पुरस्कार को वापस करने को लेकर सीआरपीएफ कमाडेंट मुन्ना सिंह के आवास पर संगोष्ठी हुई. विषय था साहित्य अकादमी पुरस्कार वापसी का औचित्य. आयोजन परिवेश संस्था की ओर से किया गया. अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ शंभु बादल ने की. सुविख्यात आलोचक डॉ भारत यायावर ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी […]

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हजारीबाग : साहित्य अकादमी पुरस्कार को वापस करने को लेकर सीआरपीएफ कमाडेंट मुन्ना सिंह के आवास पर संगोष्ठी हुई. विषय था साहित्य अकादमी पुरस्कार वापसी का औचित्य. आयोजन परिवेश संस्था की ओर से किया गया. अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ शंभु बादल ने की.
सुविख्यात आलोचक डॉ भारत यायावर ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी राजनीति होती है. रीतिकालीन कवियों में भी राजनीति थी. वे राजाओं के लिए लिखते थे, जनता के लिए नहीं. सत्ता जब जन विरोधी हो जाये तो लेखकों द्वारा सम्मान लौटाना उचित एवं विवेकपूर्ण कार्य है. साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने के पीछे की राजनीति चिंताजनक है.
डॉ शंभु बादल ने कहा कि साहित्य अकादमी एक स्वायत्तशासी संस्था है. 24 भाषाओं के साहित्यकारों को उसके रचना कर्म के लिए पुरस्कृत करती है. पुरस्कार वापसी का निर्णय स्वयं रचनाकार का होता है. मेरी दृष्टि में राजनीतिक संवदेनहीनता के विरुद्ध साहित्यकारों का पुरस्कार लौटाना उचित प्रतीत होता है. साहित्यकारों को तस्लीमा नसरीन के सवालों पर ध्यान रखना चाहिये.
कथाकार रतन वर्मा ने कहा कि महान लेखक फणीश्वरनाथ रेणु को आज तक साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान नहीं किया गया. उनकी कालजयी रचनाएं पूरे विश्व भर में पढ़ी जा रही हैं. साहित्यकारों द्वारा पुरस्कारों को लौटाना पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है. युवा कवि गणेश चंद्र राही ने कहा कि रचनाकारों द्वारा साहित्य अकादमी का पुरस्कार वापस करना एक सुनियोजित राजनीति का हिस्सा है. इसके पूर्व भी देश में लोमहर्षक घटनाएं हुई है. उस वक्त किसी रचनाकार ने इस प्रकार पुरस्कार वापस लौटाने की पहल नहीं की. बावजूद पुरस्कार का लौटाया जाना जन-विरोधी सत्तासीनों की आंखें जरूर खोलनेवाली घटना है.
विजय केसरी ने कहा कि महाकवि रवींद्रनाथ टैगोर ने जालियांवाला बाग की घटना को लेकर नाइट हुड की उपाधि एवं रेणु ने 1975 में पदमश्री का सम्मान लौटाया था. मुन्ना सिंह ने कहा कि साहित्यकार अपने विरोध में पुुुरस्कार लौटाते हैं, यह उनका निजी विचार है. बलदेव पांडेय ने कहा कि पुरस्कार लौटाना राजनीतिक से प्रेरित घटना है. कथाकार विवेक प्रियदर्शी ने कहा कि मेरी राय में पुरस्कारों को लौटाना उचित नहीं है.
अपनी सृजन शैली से विरोध करना चाहिये. कवि मन्मथनाथ मिश्र ने साहित्यकारों को नकारात्मक सोच की जगह सकारात्मक दृष्टि से ओतप्रोत होने पर बल दिया. सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी अजय कुमार सिंह ने कहा कि साहित्यकारों द्वारा पुरस्कार लौटाना समय पर प्रश्न चिह्न है.
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