तुम धरती का नमक हो काव्य संग्रह प्रकाशित

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8 हैज1 में पुस्तक का कवर पेज हजारीबाग. हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि व आलोचक भारत यायावर की ताजा काव्य संग्रह तुम धरती का नमक हो जुलाई मंे प्रकाशित होकर आया है. संग्रह का चयन एवं संपादन युवा कवि गणेश चंद्र राही ने किया है. उन्होंने भारत यायावर के तीन काव्य संग्रहों से चुनिंदा कविताआंे का […]

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8 हैज1 में पुस्तक का कवर पेज हजारीबाग. हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि व आलोचक भारत यायावर की ताजा काव्य संग्रह तुम धरती का नमक हो जुलाई मंे प्रकाशित होकर आया है. संग्रह का चयन एवं संपादन युवा कवि गणेश चंद्र राही ने किया है. उन्होंने भारत यायावर के तीन काव्य संग्रहों से चुनिंदा कविताआंे का चयन कर पुस्तक को आकार दिया है. पुस्तक एपीएन पब्लिकेशन दिल्ली से छपी है. यायावर की कविताओं से गुजरना गंवई माटी,लोक चेतना की सुगंध तथा रिश्ते नातों की प्रेम के धागे से बुनी ऐसी दुनिया से रूबरू होना है जो हमारी जिंदगी के बहुत करीब है. पुस्तक की भूमिका गणेश चंद्र राही ने लिखी है. जिसमें कहा गया है कि भारत यायावर की कविताएं प्रकृति, समाज,राष्ट्र सबको अपने व्यापक परिदृश्य में समेटती है. इसके पूर्व उनकी कवि के नामवर सिंह का आलोचना कर्म:एक, पुन: पाठ, रेणु का है अंदाजे बयां समेत दर्जनों कृतियां हिंदी साहित्य में आ चुकी है. पेपर बैक में प्रकाशित पुस्तक की कीमत 140 रुपये है.

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