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हजारीबाग : हजारीबाग शहर में लगातार बढ़ रहा है ध्वनि प्रदूषण, 94.7 डेसिबल के साथ कोर्रा सबसे प्रदूषित इलाका

Updated at : 05 Dec 2018 1:24 AM (IST)
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हजारीबाग : हजारीबाग शहर में लगातार बढ़ रहा है ध्वनि प्रदूषण, 94.7 डेसिबल के साथ कोर्रा सबसे प्रदूषित इलाका

जयनारायण, हजारीबाग : हजारीबाग शहर में ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है. पिछले एक साल में ध्वनि प्रदूषण में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि रिकॉर्ड की गयी है. लगातार हो रहे प्रदूषण से लोगों के सेहत पर असर पड़ रहा है. उनकी दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है. विशेषज्ञों की मानें, […]

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जयनारायण, हजारीबाग : हजारीबाग शहर में ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है. पिछले एक साल में ध्वनि प्रदूषण में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि रिकॉर्ड की गयी है. लगातार हो रहे प्रदूषण से लोगों के सेहत पर असर पड़ रहा है. उनकी दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है.
विशेषज्ञों की मानें, तो हॉर्न की आवाज से लोग साइकिलॉजिकल और कार्डियोवेशुला बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं. स्थिति यह है कि शहर के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर करीब 100 डेसिबल तक पहुंच गया है.
कोर्रा सबसे प्रदूषित इलाका
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक नवंबर 2018 और सात नवंबर 2018 को शहर के 15 महत्वपूर्ण स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण मापने का यंत्र लगाया. सुबह छह बजे से रात दस बजे तक ध्वनि को रिकॉर्ड किया गया. इससे जो जानकारी सामने आयी, उसमें शहर में सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण कोर्रा में पाया गया. यहां 80.6 से 94.7 डेसिबल तक ध्वनि रिकॉर्ड की गयी. मानक के अनुसार इस क्षेत्र में 65 डेसिबल ध्वनि का मानक होना चाहिए था.
इसी तरह देवांगना में 93.8, जादो बाबू चौक 92.9, झंडा चौक 91.2, डीवीसी टाउनशिप क्षेत्र 91.7, गांधी मैदान वेस्ट 86.6,बंशीलाल चौक 89.7, सरकारी बस स्टैंड 86.6, सदर अस्पताल 72.4, इंद्रपुरी चौक 85, जिला स्कूल 75.8, पीटीसी कॉलेज 79.2, जिला परिषद चौक 87.2, सिविल कोर्ट एरिया 52.3, संत कोलंबस कॉलेज के पास 75.9 डेसिबल ध्वनि की मानक तय की गयी.
क्यों बढ़ रहा है ध्वनि प्रदूषण
हजारीबाग जिले में प्रत्येक वर्ष करीब 40 हजार नये वाहन सड़क पर उतर रहे हैं. डीटीओ कार्यालय में प्रतिमाह औसतन साड़े तीन हजार नये वाहनों का पंजीयन होता है. सबसे अधिक दो पहिया वाहनों का पंजीयन होता है. इस वर्ष एक साल में करीब 30 हजार से अधिक दो पहिया वाहनों का पंजीयन हुआ. सड़क पर हॉर्न बजाने से सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण होता है.
इसके अलावा पिछले एक साल से बिजली की भी स्थिति दयनीय होने के कारण जेनरेटर से भी ध्वनि प्रदूषण बढ़ा है. ध्वनि प्रदूषण का कारण शादी ब्याह, पूजा, उत्सव और नेताओं की निकलनेवाली रैली भी है. लाउस्पीकर व डीजे से भी ध्वनि प्रदूषण बढ़ा है.
क्या कहते हैं चिकित्सक
इनएटी विशेषज्ञ डॉ एसपी सिंह के अनुसार हजारीबाग में ध्वनि प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि एक दो साल में प्रदूषण से प्रभावित मरीजों की संख्या दोगुनी हुई है. क्लिनिक में आये दिन ऐसे शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं. अत्यधिक शोर निरंतर सुनने से मनोवैज्ञानिक विकृति आती है.
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