जर्जर भवन में आरटीए कार्यालय संचालित, न अफसरों को बैठने की जगह, न फाइलों की सुरक्षा

हजारीबाग. हजारीबाग में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार आरटीए का अपना कार्यालय भवन नहीं है. जिला परिवहन कार्यालय परिसर स्थित जर्जर भवन में आरटीए कार्यालय संचालित हो रहा है, जो 1977 में पीडब्लूडी कार्यालय भवन था. इस कार्यालय में अधिकारियों को भी बैठक की सुविधा नहीं है. कर्मियों को कामकाज करने की भी सुविधा नहीं दी गयी […]
हजारीबाग. हजारीबाग में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार आरटीए का अपना कार्यालय भवन नहीं है. जिला परिवहन कार्यालय परिसर स्थित जर्जर भवन में आरटीए कार्यालय संचालित हो रहा है, जो 1977 में पीडब्लूडी कार्यालय भवन था. इस कार्यालय में अधिकारियों को भी बैठक की सुविधा नहीं है. कर्मियों को कामकाज करने की भी सुविधा नहीं दी गयी है. ज्ञात हो कि हजारीबाग आरटीए कार्यालय से हजारीबाग सहित चतरा, कोडरमा, रामगढ़, बोकारो, धनबाद एवं गिरिडीह में चलनेवाली छोटी-बड़ी वाहनों के लिए परमिट जारी की जाती है. वहीं ट्रांसपोटिंग लाइसेंस निर्गत होता है.
1975 से है कार्यालय: हजारीबाग में आरटीए कार्यालय 1975 में बना. शुरुआत में कचहरी परिसर के एसडीओ कार्यालय समीप था, जो 1977 में पीडब्लूडी कार्यालय भवन में शिफ्ट हुआ. तत्कालीन पीडब्लूडी के कार्यपालक अभियंता हरिद्वार पांडेय आटीए कार्यालय से महीने का भाड़ा लेते थे. 1989 में आरटीए ने भाड़ा देना बंद कर दिया.
फाइल सुरक्षित नहीं: जर्जर एवं खंडहर आरटीए भवन की स्थित यह है कि यहां फाइल तक सुरक्षित नहीं है. सात जिलों के ट्रांसपोटरों के वाहनों के एक लाख से अधिक फाइलें कार्यालय में मौजूद है. भवन नहीं होने के कारण फाइलों को जैसे-तैसे रखा गया है. बरसात के दिनों में फाइलें खराब होती हैं.
परिवहन कार्यालय में एक कमरा: लंबे प्रयास के बाद कार्यालय चलाने के लिये आरटीए को परिवहन कार्यालय में एक कमरा दिया गया है. इस कमरे को आटीए ने कंप्यूटर कक्ष बनाया है. एक कमरा होने के कारण कामकाज में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
लोगों के बैठक की व्यवस्था नहीं: कार्यालय में आमलोगों के लिए बैठने की व्यवस्था नहीं है. ट्रांसपोटरों के साथ बैठक के लिए हॉल नहीं है. इस कारण आरटीए ट्रांसपोटरों के साथ नियमित बैठक नहीं कर पाते हैं. आटीए कार्यालय को आमलोग पता नहीं कर पाते हैं. आरटीए कार्यालय का अपना बोर्ड तक नहीं है. लोग पूछ कर आरटीए कार्यालय पहुंचते हैं.
अपना भवन नहीं होने के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. भवन बनाने के लिए सरकार को पत्र लिखा गया है. सरकार को सभी समस्याओं से अवगत कराया गया है.
पीके प्रभाकर, आरटीए
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