नोटबंदी का खामियाजा जनता भुगत रही है : भुवनेश्वर मेहता

Published at :30 Oct 2017 11:38 AM (IST)
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नोटबंदी का खामियाजा जनता भुगत रही है : भुवनेश्वर मेहता

हजारीबाग: केंद्र सरकार के नोटबंदी के निर्णय के एक वर्ष पूरा होने पर विपक्षी दलों एवं सामाजिक संगठनों ने आठ नवंबर को काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है. इस दिन पूरे देश के जिला, अनुमंडल एवं प्रखंड मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन होगा. विपक्षी दलों के इस निर्णय को सफल बनाने के लिए सीपीआइ के जिला […]

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हजारीबाग: केंद्र सरकार के नोटबंदी के निर्णय के एक वर्ष पूरा होने पर विपक्षी दलों एवं सामाजिक संगठनों ने आठ नवंबर को काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है. इस दिन पूरे देश के जिला, अनुमंडल एवं प्रखंड मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन होगा. विपक्षी दलों के इस निर्णय को सफल बनाने के लिए सीपीआइ के जिला कार्यालय मंजूर भवन में रविवार को सर्वदलीय बैठक हुई.

अध्यक्षता अधिवक्ता गुलाम जिलानी ने की. इसमें लिये गये निर्णय की जानकारी सीपीआइ राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने पत्रकारों को दी. उन्होंने कहा कि आठ नवंबर 2016 की रात 12 बजे से हजार और पांच सौ के नोटों को चलन से बाहर किये जाने के मोदी सरकार के फैसले से देश को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है.

विदेशों से कालाधन लाकर देशवासियों के बैंक खाते में 15-15 लाख भेजने का वादा नरेंद्र मोदी ने किया था. यह राशि अब तक खाते में नहीं पहुंची है. नोटबंदी के कारण छोटे व्यापारी, व्यवसायियों की कमर टूट गयी है. करोड़ों की संख्या में मजदूर बेरोजगार हुए हैं. छोटे कल-कारखाने नकदी के अभाव में बंद हो गये. प्रधानमंत्री के इस निर्णय का खामियाजा देश की जनता को भुगतना पड़ रहा है. हालात खराब हो रहे हैं. ऐसे में विपक्ष चुप नहीं रह सकता. इसी बात को लेकर तमाम विपक्षी पार्टियों ने आठ नवंबर को काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि झारखंड में रघुवर दास की सरकार ने किसानों की जमीन छीन कर पूंजीपतियों को देने, सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन करने, गलत स्थानीय नीति बनाने जैसे मुद्दे पर भी झारखंड में विपक्षी दल 13 नवंबर को विशाल धरना-प्रदर्शन करेगा. प्रस्ताव लिया गया है कि भूमि अधिग्रहण करने के खिलाफ आंदोलन में जिन लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज हैं, उन्हें सरकार वापस ले. झारखंड में भूख से हुई मौत पर विपक्षी दलों ने निंदा की और इस मामले से जुड़े सरकारी पदाधिकारियों को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की गयी़ उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर उस समय तक आंदोलन जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती. विपक्ष अपना आंदोलन को धारदार बनाकर केंद्र एवं राज्य से भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकेगी. बैठक में कांग्रेस, सीपीआइ, सीपीएम, मासस, समाजवादी पार्टी, जेडीयू शरद गुट, आरजेडी, जेवीएम के नेता एवं 22 सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि शामिल हुए.

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