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सेरका शिवलिंग का हर छह माह में बदलता है रंग

Updated at : 20 Jul 2025 6:03 PM (IST)
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सेरका शिवलिंग का हर छह माह में बदलता है रंग

बिशुनपुर मुख्यालय से सटे सेरका गांव स्थित अति प्राचीन शिवालय मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र है.

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20 गुम 21 में सेरका शिवालय 20 गुम 22 में मंदिर के अंदर शिवलिंग बसंत साहू, बिशुनपुर बिशुनपुर मुख्यालय से सटे सेरका गांव स्थित अति प्राचीन शिवालय मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र है. मंदिर में खासियत यह है कि नागेश्वर नाथ एवं दूधेश्वर नाथ दो शिवलिंग है. जिनका साल में दो बार रंग बदल जाता है. कभी वह लाल हो जाता है तो कभी सफेद. खास बात यह है कि सावन आते ही मंदिर का शिवलिंग सफेद रंग में हो जाता है. जिस कारण लोगों का अटूट आस्था इस शिवालय से है. भक्ति व श्रद्धा यहां देखने को मिलता है. मंदिर अति प्राचीन होने के कारण इसकी नक्काशी भी देखते बनता है. बताया जाता है कि अंग्रेजों का भारत आगमन से वर्षों पूर्व एक साहू ने राजा भैया साहब से भीख में जमीन मांग कर सेरका चट्टी स्थित शिवालय मंदिर व तालाब का निर्माण कराया था. गांव के वृद्ध चंदू गिरी कहते हैं कि मैं अपने नाना से सुना था. राजा भैया साहब के राज्य में एक साहू परिवार रहता था जो निर्वंश था जो अपने जीवन काल के समय राजा भैया साहब से भीख में एक जमीन का टुकड़ा मांग कर यह मंदिर का निर्माण कराया था. जिसमें दूधेश्वर एवं नागेश्वर नामक शिवलिंग कसे स्थापित कराया था. शिवलिंग छह माह में अपना रंग बदलकर सफेद से लाल हो जाया करता था. बताया जाता है कि इस शिवालय में जो पूर्ण विश्वास के साथ अपनी मन्नतें मांगते हैं. उनकी मन्नत पूरी होती है. सावन माह में यहां भक्तों की भीड़ हर सोमवार को उमड़ती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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