जनगणना कॉलम में सरना कोड देना होगा : चमरा लिंडा

सिरसीता नाला सरना स्थल पर राजकीय समारोह का आयोजन
सिरसीता नाला सरना स्थल पर राजकीय समारोह का आयोजन, मंत्री चमरा लिंडा ने कहागुमला. डुमरी प्रखंड के आकासी गांव स्थित पवित्र सिरसीता नाला (ककड़ोलता) सरना स्थल में सरना धर्म आध्यात्मिक महासमागम (राजकीय समारोह) का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग, झारखंड सरकार के तत्वावधान में जिला प्रशासन गुमला के नेतृत्व में संपन्न हुआ. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ. इसके बाद सामूहिक पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान तथा भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया. इस अवसर पर झारखंड सरकार के मंत्री चमरा लिंडा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. मौके पर मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि सरना धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि प्रकृति आधारित जीवन दर्शन है, जो मानव को नैतिकता, अनुशासन व सामाजिक उत्तरदायित्व का मार्ग दिखाता है. उन्होंने कहा कि सरना समाज के पास लिखित धर्मग्रंथ नहीं हैं, लेकिन कथा, गीत, परंपरा, पूजा-पाठ और कहावतें ही इसकी आत्मा हैं. उन्होंने सिरसीता नाला सरना स्थल को सृष्टि की उत्पत्ति से जुड़ा बताते हुए इसे आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र कहा. उन्होंने नशाखोरी और डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों पर चिंता जतायी. मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आगामी जनगणना में सरना कोड दिया जाना अनिवार्य है. यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आदिवासी समाज आंदोलन को बाध्य होगा. उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा सरना स्थलों के संरक्षण और सीमांकन पर भी बल दिया. कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय सरना धर्म गुरु चितरंजन उरांव, उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित, पुलिस अधीक्षक हरिश बिन जमां, उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महतो, विधायक प्रतिनिधि सुनील उरांव, एसडीओ पूर्णिमा कुमारी, बीडीओ उमेश कुमार स्वांसी, आदिवासी नेता मोहरलाल उरांव समेत बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता व हजारों की संख्या में सरना समाज के लोग उपस्थित थे.
धर्म और संस्कृति के प्रति सजग हों युवा : राम सूर्य मुंडा
खूंटी विधायक राम सूर्य मुंडा ने कहा कि सिरसीता नाला वर्षों से श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. उन्होंने युवाओं से अपने धर्म, संस्कृति और भाषा की रक्षा के लिए सजग रहने की अपील की और कहा कि सरकार समाज के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है.पूर्वजों की धरोहर को बचाना हमारी जिम्मेदारी : जिग्गा सुसारन
सिसई विधायक जिग्गा सुसारन होरो ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराएं पूर्वजों की अमूल्य धरोहर हैं. उन्होंने युवाओं से शिक्षा के साथ-साथ अपने धर्म व संस्कृति को मजबूत करने का आह्वान किया तथा सरकार की योजनाओं का लाभ लेने की अपील की.शिक्षा से ही धर्म और संस्कृति की रक्षा संभव : उपायुक्त
उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने कहा कि सरना धर्म मानव व प्रकृति के सह अस्तित्व का सशक्त उदाहरण है. उन्होंने माताओं से बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक रहने को कहा. कहा कि शिक्षित समाज ही अपने धर्म, भाषा व संस्कृति की रक्षा कर सकता है. उन्होंने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए समाज के साथ खड़ा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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