गुमला का ‘मिलेट मिशन’ बना हावर्ड यूनिवर्सिटी का केस स्टडी, केवल 18 महीनों में रागी की खेती फैली थी 30,000 एकड़ तक
Published by : Sameer Oraon Updated At : 19 Jan 2025 9:28 AM
‘मिलेट मिशन’ के तहत हो रही रागी की खेती
Millet Mission Jharkhand : गुमला का मिलेट मिशन हावर्ड यूनिवर्सिटी का केस स्टडी बना है. इसमें वर्ष 2022-23 तक इस योजना के तहत किये गये कार्यों का जिक्र है.
रांची, मनोज सिंह: गुमला जिले का ‘मिलेट मिशन’ हावर्ड यूनिवर्सिटी में केस स्टडी बना है. जिले में किये गये कार्यों को ‘महात्मा गांधी नेशनल फेलोशिप’ के केस स्टडी के रूप में पेश किया गया है. इस फेलोशिप के रिसर्च को हावर्ड बिजनेस स्कूल में केस स्टडी बनाकर पेश किया गया. वर्ष 2022-23 तक यहां कराये गये कार्यों को केस स्टडी के रूप में पेश किया गया है. उस वक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सुशांत गौरव गुमला के उपायुक्त थे.
90 फीसदी किसान सिंचाई के लिए बारिश पर थे निर्भर
गुमला के 90 फीसदी सीमांत किसान सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर थे. सबसे अधिक पानी की खपतवाली फसल धान की खेती करते थे. कृषि के वैज्ञानिक तरीकों से बहुत अवगत नहीं थे. वर्ष 2023 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने ‘इंटरनेशनल रागी डे’ घोषित किया था. झारखंड का मौसम मड़ुआ (रागी) की खेती के अनुकूल था.
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करीब 30 हजार एकड़ में लगायी गयी फसल
गुमला के तत्कालीन जिला कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार सिन्हा बताते हैं कि उपायुक्त के निर्देश पर हमलोगों ने काम करना शुरू किया. किसानों को बताया कि मड़ुआ शुष्क भूमि के लिए उपयुक्त फसल है. जिला ने राष्ट्रीय बीज निगम से गुणवत्तायुक्त मड़ुआ का बीज लिया. केवल 18 महीनों में रागी की खेती 1300 एकड़ से बढ़कर 30,000 एकड़ तक फैल गयी. इसके बाद जिले में प्रसंस्करण इकाई लगायी गयी. इससे महिलाओं को जोड़ा गया. इन इकाइयों से हर दिन एक टन रागी तैयार होने लगा. इसमें रागी का लड्डू और स्नैक्स भी थे.
कुपोषण दूर करन का प्रयास
लड्डू का वितरण आगंबाड़ी केंद्र में किया जाने लगा. इसके वितरण से बच्चों व स्तनपान करानेवाली माताओं का कुपोषण दूर करने में मदद मिली. आंगनबाड़ियों में स्वास्थ्य जांच इकाइयां शुरू की गयीं. इससे महिलाओं के स्वास्थ्य में बदलाव दिखा.
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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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