Jharkhand News : मॉडल विलेज झरगांव का हाल-बेहाल, कभी दिल्ली में बजा था इसका डंका

Updated at : 14 Dec 2020 1:17 PM (IST)
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Jharkhand News : मॉडल विलेज झरगांव का हाल-बेहाल, कभी दिल्ली में बजा था इसका डंका

गुमला जिले के झरगांव की स्थिति, कभी बना था मॉडल विलेज, आज है बदहाल

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jharkhand news, gumla news, gumla model village, model village jharkhand गुमला : जिस गांव का डंका दिल्ली में बजा. पुरस्कार भी मिला. गुमला ने वाहवाही भी लूटी. वही गांव आज बदहाल है. खेतों में सिंचाई के लिए पानी नहीं है. आधा- अधूरी सड़क बनी है. मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर हो गया. सामुदायिक शौचालय बेकार पड़े हैं. कई घरों में शौचालय नहीं हैं. महिलाएं व लड़कियां खुले में शौच करने को मजबूर हैं. गांव नशे में जकड़ा हुआ है. ये हाल है गुमला के मॉडल विलेज झरगांव का.

गुमला से 11 किलोमीटर दूर टोटो पंचायत में आता है झरगांव. गांव में 542 महिलाएं व 552 पुरुष हैं. वोटरों की संख्या 750 है. एक साल पहले 100 करोड़ रुपये से नहर बनी है. नहर गांव से होकर गुजरी है, लेकिन नहर में बूंद भर पानी नहीं है. सिर्फ बरसाती पानी जमा होता है. बरसात खत्म होते ही पानी सूख जाता है. गांव में एक तालाब है. लंबे समय से मरम्मत व सीढ़ी की मांग हो रही है. इस ओर भी किसी का ध्यान नहीं है.

2011 में दिल्ली में पुरस्कार मिला था :

वर्ष 2010 में तत्कालीन डीसी की पहल पर झरगांव को मॉडल विलेज बनाया गया था. वर्ष 2011 में मॉडल विलेज झरगांव का प्रारूप बनाकर ग्रामीण विकास विभाग दिल्ली को भेजा गया. उस समय की सरकार मॉडल विलेज का प्रारूप देखकर खुश हुई. गुमला के तत्कालीन डीसी को पुरस्कृत किया गया था, लेकिन जैसे ही डीसी का तबादला हुआ, झरगांव का विकास ठप हो गया. वर्ष 2010 व 2011 में अचानक सुर्खियों में आया गांव आज गौण हो गया.

झरगांव में ये काम हुए थे :

मॉडल विलेज झरगांव में संसद भवन, मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र, बाएफ द्वारा एक पशु चिकित्सा केंद्र की स्थापना की गयी थी, लेकिन पशु अस्पताल छोड़कर सभी भवन जर्जर हो गये हैं. सालों से रंगरोगन नहीं हुआ है. गांव की 72 महिला लाभुकों के बीच पांच-पांच बकरी का वितरण, 11 महिला मंडल को ग्रेडिंग कर लोन वितरण, 10 लाभुकों के बीच सूकर वितरण, तीन खलिहान का निर्माण कराया गया था, वहीं गांव में पूर्ण शराबबंदी की गयी थी.

ग्रामीण कहते हैं कि बकरी व सूकरों की मौत हो गयी. चार-पांच लाभुकों के घर बकरी जिंदा हैं. गांव में कुछ दूरी तक सड़क बनी थी, लेकिन गांव के अधिकांश हिस्से की सड़क कच्ची मिट्टी की है. इससे बरसात में कीचड़ के कारण आवागमन में काफी परेशानी होती है.

ग्रामीणों का दर्द

हमारा गांव मॉडल विलेज है. जो सुविधा चाहिए. वह नहीं है. खेत को पानी चाहिए. पांच डीप बोरिंग की मांग की गयी थी, लेकिन नहीं हुई. सिर्फ बरसात में खेती करते हैं. यहां रोजगार का कोई साधन नहीं है. कई लोग तो पलायन कर गये हैं.

मनोज उरांव, ग्रामीण, झरगांव

गांव में महिलाओं का अलग-अलग समूह है. लोन मिला है. मुर्गीपालन करते हैं. अगर गांव को मॉडल विलेज बनाना है, तो यहां सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारना होगा. रोजगार नहीं रहने के कारण गांव में फिर हड़िया व दारू की बिक्री की जा रही है.

फूलमनी कच्छप, महिला मंडल, झरगांव

posted by : sameer oraon

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