डायन बिसाही, भूत-पिशाच जैसे अंधविश्वास में जकड़ा है गुमला, जानें अंधविश्वास के कारण अबतक गई कितनी जानें

Updated at : 24 Apr 2022 1:34 PM (IST)
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डायन बिसाही, भूत-पिशाच जैसे अंधविश्वास में जकड़ा है गुमला, जानें अंधविश्वास के कारण अबतक गई कितनी जानें

अंधविश्वास की जो मोटी परत गुमला में जमी है. वह कम होती दिखायी नहीं दे रही. अंधविश्वास में हत्या के अलावा वृद्धों को गांवों से सिर मुड़ कर गांव से निकालने तक की घटना घट चुकी है. सबसे दुखद बात यह है कि कई ऐसी घटनाएं पढ़े लिखे लोगों के सामने हुई. लेकिन पढ़े लिखे लोग मूक-दर्शक बने रहे.

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दुर्जय पासवान, गुमला : गुमला जिला से अंधविश्वास कम नहीं हो रहा है. जादू-टोना, भूत-पिशाच व डायन बिसाही जैसे अंधविश्वास में गुमला जकड़ा हुआ है. यही वजह है. गुमला में अंधविश्वास में हत्या होती रहती है. गुमला जिले में सबसे ज्यादा अंधविश्वास है. इसका उदाहरण हाल के वर्षों में तीन से अधिक लोगों की डायन बिसाही में हुई हत्या है. इसमें कुछ घटनाओं ने पूरे समाज को प्रभावित किया है. हैरत करने वाली घटना भी घटी है. गुमला की घटना ने सरकार तक को अंधविश्वास के खिलाफ सोचने पर मजबूर किया.

डीसी, एसपी के अलावा पूरा सिस्टम परेशान रहा. लेकिन अंधविश्वास की जो मोटी परत गुमला में जमी है. वह कम होती दिखायी नहीं दे रही. अंधविश्वास में हत्या के अलावा वृद्धों को गांवों से सिर मुड़ कर गांव से निकालने तक की घटना घट चुकी है. सबसे दुखद बात यह है कि कई ऐसी घटनाएं पढ़े लिखे लोगों के सामने हुई. लेकिन पढ़े लिखे लोग मूक-दर्शक बने रहे. सबसे ज्यादा अंधविश्वास गांवों में है.

मिल कर पहल करनी होगी

अंधविश्वास को खत्म करने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आना होगा. गांव में काम कर रही महिला समूहों को भी इसमें अहम भूमिका निभानी होगी. जनप्रतिनिधि भी इसमें रूचि दिखाते हुए लोगों को जागरूक करें. तभी गांवों से अंधविश्वास खत्म होगा. क्योंकि प्रशासन के भरोसे अंधविश्वास को खत्म नहीं किया जा सकता है.

सरकार ने अभियान चलाया

गुमला में अंधविश्वास के फैलते जड़ को खत्म करने के लिए प्रशासन व गुमला पुलिस गांव गांव में जागरूकता अभियान चला रही है. जरूरत के अनुसार प्रशासनिक अधिकारी भी गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन इसका असर नहीं पड़ रहा. प्रशासन का मानना है. गांव की महिलाएं जिस दिन समझ जायेंगी कि अंधविश्वास मन का भ्रम है. उस दिन से अंधविश्वास खत्म हो जायेगा.

अंधविश्वास में हुई हत्याएं

24 फरवरी 2021 को कामडारा प्रखंड के पहाड़गांव में अंधविश्वास में पांच लोगों की निर्मम हत्या कर दी गयी थी. ग्रामीणों ने पहले बैठक की थी. इसके बाद सभी को मौत के घाट उतार दिया था.

23 जुलाई 2019 को सिसई प्रखंड के नगर सिसकारी गांव में चार लोगों की हत्या कर दी गयी थी. ये चारों वृद्ध थे. ग्रामीणों ने बैठक करने के बाद इन चारों वृद्धों को मार दिया था.

वर्ष 2011 को पालकोट थाना क्षेत्र के बिलिंगबीरा में डायन बिसाही में पति, पत्नी व मासूम बेटे की हत्या कर दी गयी थी. इतना ही नहीं शव को जमीन में गाड़ दिया था. पुलिस ने दो महीने बाद शव बरामद की थी.

वर्ष 2018 को गुमला शहर से सटे सोसो महलीटोली में डायन बिसाही में वृद्ध दंपती की उसके ही तीन बच्चों के सामने हत्या कर दी गयी थी. इस हत्याकांड का उदभेदन हो चुका है. परंतु अभी भी इस गांव में अंधविश्वास है.

वर्ष 2021 को गुमला के लुटो पनसो गांव में डायन बिसाही में भतीजे ने चाचा, चाची व भाभी की टांगी से काटकर हत्या कर दिया था. पुलिस ने आरोपी भतीजा विपता उरांव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

22 अप्रैल 2022 को चैनपुर प्रखंड के बुकमा गांव में डायन बिसाही में महिला ने अपने ही जेठ व जेठानी की बेरहमी से गला को टांगी से काट कर हत्या कर दी. इसके बाद आरोपी ने थाने में सरेंडर कर दिया

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